
मुख्य बिंदु:
- 18 मई को ऋषिकेश के खांड गांव के पास पटरी से उतरी थी खाली उज्जैनी एक्सप्रेस।
- रेलवे ने ऑपरेटिंग, सीएनडब्ल्यू (C&W) और लोको अनुभाग के 8 कर्मचारियों को बनाया आरोपी।
- मुख्य आरोपी लोको पायलट को हटाकर प्रशिक्षण के लिए चंदौसी भेजा गया।
- बिना लोको पायलट की मौजूदगी के ट्रेन की चेन और पहियों के नीचे से गुटके हटाने से हुआ था हादसा।
- देहरादून के पुराने रेल हादसे के दोषी शंटिंग मास्टर की एक साल के लिए रुकी वेतन बढ़ोतरी।
ऋषिकेश/देहरादून:
उत्तराखंड के ऋषिकेश में पिछले महीने हुए उज्जैनी एक्सप्रेस हादसे को लेकर रेलवे प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। रेलवे विभाग ने लापरवाही के इस गंभीर मामले में ऑपरेटिंग, सीएनडब्ल्यू और लोको अनुभाग के कुल आठ कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके साथ ही, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य आरोपी लोको पायलट को उसके पद से तत्काल हटाकर उत्तर प्रदेश के चंदौसी स्थित प्रशिक्षण केंद्र भेज दिया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े शेष अन्य दोषी कर्मचारियों पर भी इसी महीने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
क्या था पूरा मामला?
यह दुर्घटना बीते 18 मई की रात ऋषिकेश के खांड गांव के पास योग नगरी रेलवे स्टेशन यार्ड में हुई थी। स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14317) को शंटिंग प्रक्रिया (ट्रैक बदलने) के तहत खड़ा किया गया था। इसी दौरान ट्रेन अचानक अनियंत्रित होकर वाशिंग लाइन के आखिरी छोर पर लगे बफर स्टॉप से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन का इंजन और तीन कोच पटरी से उतरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
राहत की बात यह रही कि हादसे के समय ट्रेन पूरी तरह खाली थी, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली और मुरादाबाद रेल मंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी लगातार मामले की निगरानी के लिए मौके पर पहुंचे थे।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
रेलवे की तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि यह हादसा सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी के कारण हुआ था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, जब यह घटना हुई तब लोको पायलट अपनी जगह पर मौजूद नहीं था। उसकी गैरमौजूदगी में ही ट्रेन को सुरक्षित खड़ा रखने के लिए लगाए गए चेन और पहियों के नीचे रखे लकड़ी व लोहे के गुटके (Chocks) हटा दिए गए। इस कारण ढलान होने की वजह से ट्रेन बिना नियंत्रण के पीछे की तरफ लुढ़क गई और हादसे का शिकार हो गई।
इसी लापरवाही को आधार बनाते हुए रेलवे ने संबंधित लोको पायलट और सात अन्य कर्मचारियों को आरोपी मानते हुए चार्जशीट जारी की है। सभी आरोपी कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने का समय दिया गया है, जिसके भीतर उन्हें विभाग के समक्ष लिखित जवाब प्रस्तुत करना होगा।
देहरादून हादसे के दोषी शंटिंग मास्टर पर भी बड़ी कार्रवाई
ऋषिकेश हादसे की कार्रवाई के साथ ही रेलवे ने पुराने मामलों की फाइलें खोलकर भी सख्त कदम उठाए हैं। फरवरी 2023 में देहरादून टर्मिनल स्टेशन पर नंदा देवी एक्सप्रेस के चार पहिए पटरी से उतर गए थे और ट्रेन पीछे की दीवार से टकरा गई थी। इस मामले की विस्तृत जांच के बाद रेलवे ने दोषी पाए गए शंटिंग मास्टर पर बड़ी कार्रवाई की है।
शंटिंग मास्टर पर आरोप था कि शंटिंग प्रक्रिया के दौरान उसने लोको पायलट को सही और सटीक जानकारी नहीं दी, जिससे लोको पायलट समय पर ब्रेक नहीं लगा सका। इस गंभीर लापरवाही के कारण शंटिंग मास्टर की एक वर्ष के लिए वेतन बढ़ोतरी (इन्क्रीमेंट) रोक दी गई है।
जल्द होगी शेष कर्मचारियों पर कार्रवाई: रेलवे प्रशासन
मुरादाबाद मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा:
“ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के डिब्बे और इंजन पटरी से उतरने के मामले में लोको पायलट को हटा दिया गया है। सभी आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट भी जारी कर दी गई है। इस पूरे मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और शेष दोषी कर्मचारियों पर भी जल्द ही नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
