
मुख्य बिंदु:
- केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के मॉडल पर अब उत्तराखंड में भी वर्ष में दो बार आयोजित होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET)।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य।
- 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त बीएड धारक शिक्षकों के लिए आवेदन में अलग विकल्प न होने से नौकरी पर संकट।
- एनसीटीई (NCTE) नियमों के चलते अलग से ‘विशेष टीईटी’ संभव नहीं, आवेदन में ‘सेवारत शिक्षक’ का विकल्प जोड़ने पर विचार।
- सितंबर 2025 के बाद से राज्य में नहीं हुई है कोई टीईटी परीक्षा; शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दिए जल्द फैसले के संकेत।
देहरादून:
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हजारों सेवारत शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर आ रही है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) की तर्ज पर अब उत्तराखंड सरकार भी साल में दो बार उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) आयोजित करने की तैयारी कर रही है। सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, शिक्षकों को पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दायरे में आने वाले शिक्षकों की सुविधा के लिए अन्य तकनीकी विकल्पों पर भी जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और 2028 की समयसीमा
दरअसल, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया है। अदालत के निर्देशानुसार, इन शिक्षकों को अपनी पदोन्नति सुरक्षित रखने और सेवा में बने रहने के लिए 31 अगस्त 2028 तक हर हाल में टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
इस समयसीमा के विपरीत उत्तराखंड में वर्तमान में साल में मुश्किल से एक बार ही यूटीईटी परीक्षा आयोजित हो पाती है। पर्याप्त अवसर न मिलने के कारण शिक्षकों के सामने समय पर परीक्षा पास करने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
हजारों सेवारत शिक्षकों की नौकरी पर संकट
राज्य में एक और बड़ी समस्या यह है कि सीटीईटी और यूटीईटी के आवेदन पत्रों में उन बीएड (B.Ed) योग्यताधारी शिक्षकों के लिए कोई अलग से विकल्प नहीं दिया गया है, जिनकी नियुक्ति 23 अगस्त 2010 से पहले हुई थी। इस तकनीकी खामी के कारण उत्तराखंड के हजारों सेवारत शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है।
इस संकट से उबरने के लिए पीड़ित शिक्षकों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि उनके लिए विभाग द्वारा अलग से एक ‘विशेष यूटीईटी’ परीक्षा आयोजित की जाए।
नियमों की अड़चन और बीच का रास्ता
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के कड़े नियमों के तहत सेवारत शिक्षकों के लिए किसी भी तरह की अलग से “विभागीय या विशेष टीईटी” कराने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इस तकनीकी अड़चन को देखते हुए अब सरकार अन्य व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें सबसे मजबूत प्रस्ताव यह है कि यूटीईटी प्रथम (UTET-I) के आवेदन फॉर्म में आवश्यक योग्यताओं के साथ-साथ एक विशेष कॉलम के रूप में ‘सेवारत शिक्षक’ (Serving Teacher) का विकल्प जोड़ दिया जाए, ताकि ये शिक्षक बिना किसी तकनीकी बाधा के आवेदन कर सकें।
सितंबर 2025 के बाद से नहीं हुई परीक्षा
उत्तराखंड में आखिरी यूटीईटी परीक्षा 27 सितंबर 2025 को आयोजित की गई थी, जिसे अब लगभग एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। इस लंबी अवधि के दौरान राज्य में दोबारा इस परीक्षा का आयोजन नहीं हो सका है, जबकि केंद्र सरकार नियमित रूप से वर्ष में दो बार सीटीईटी कराती है।
इस संबंध में उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद सिमल्टी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में नियमों के तहत साल में एक ही बार परीक्षा कराई जा रही है। शासन से लिखित निर्देश या संशोधित नियमावली प्राप्त होते ही इसे साल में दो बार कराने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी।
जल्द बैठक कर निर्णय लेगी सरकार
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के आला अधिकारी और कैबिनेट मंत्री लगातार विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं:
“शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए वर्तमान में कितने कार्यरत शिक्षक अर्हता रखते हैं, विभाग द्वारा इसका पूरा परीक्षण कराया जा रहा है। शिक्षकों की ओर से अलग से विशेष टीईटी कराने की जो मांग की जा रही है, उसके सभी तकनीकी व कानूनी पहलुओं को देखा जा रहा है।”– रविनाथ रामन, शिक्षा सचिव, उत्तराखंड
“हमारे शिक्षक समय पर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण कर सकें और उनकी नौकरी पर कोई संकट न आए, इसके लिए सरकार सभी विकल्पों पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है। जल्द ही इस संबंध में अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की जाएगी और सरकार की ओर से अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।”– डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड
