पिथौरागढ़. भगवान शिव के भक्तों और प्रकृति प्रेमियों के लिए उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक बेहद शानदार खबर है। बहुप्रतीक्षित ‘आदि कैलाश’ और ‘ऊं पर्वत’ की यात्रा का शंखनाद हो गया है। सीमांत क्षेत्र धारचूला से एसडीएम आशीष जोशी ने ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच 200 यात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
सबसे अच्छी बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अक्टूबर 2023 के दौरे के बाद यह क्षेत्र अब विश्व पटल पर छा गया है, जिससे न सिर्फ शिवभक्तों की राह आसान हुई है, बल्कि सीमांत क्षेत्र के लोगों की आजीविका में भी जबरदस्त उछाल आया है।
कैलाश मानसरोवर का सबसे अच्छा विकल्प
जो श्रद्धालु चीन के रास्ते होने वाली ‘कैलाश मानसरोवर’ यात्रा पर नहीं जा पाते, उनके लिए ‘आदि कैलाश’ एक बेहतरीन और सुगम विकल्प बनकर उभरा है। जहां चारधाम या मानसरोवर यात्रा में हफ्तों का समय लगता है, वहीं यह रोमांचक और आध्यात्मिक यात्रा मात्र 5 से 7 दिनों में पूरी हो जाती है। कम भीड़ और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के कारण युवा भी अब इसे तेजी से पसंद कर रहे हैं।
पॉइंट्स में जानिए, इस यात्रा से जुड़ी कुछ बेहतरीन और पॉजिटिव बातें:
कैसा रहेगा 140 किलोमीटर का यह अद्भुत सफर?
धारचूला से रवाना हुए यात्री 140 किलोमीटर का सफर तय कर गुंजी और कुटी होते हुए ‘ज्योलिंगकांग’ पहुंचेंगे। यहाँ वे पवित्र पार्वती सरोवर के जल का आचमन कर ‘आदि कैलाश’ के दर्शन करेंगे। इसके बाद वापस गुंजी लौटकर ‘नाभिढांग’ जाएंगे, जहां से अद्भुत ‘ऊं पर्वत’ (Om Parvat) के साक्षात दर्शन होंगे।
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