हरिद्वार. देश के आदिवासी, वनवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए एक बहुत ही सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाली खबर है। आजादी के दशकों बाद अब यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे। इसी लक्ष्य को लेकर हरिद्वार के बहादराबाद स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में जनजातीय कार्य मंत्रालय का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित किया गया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि आदिवासी समाज अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहकर किस तरह देश के आधुनिक विकास का हिस्सा बने और गर्व महसूस करे।
‘संभाग, संवाद और समाधान’ पर हुआ मंथन
गुरुवार को शुरू हुए इस चिंतन शिविर में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, योगगुरु स्वामी रामदेव और पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के साथ-साथ जनजातीय समुदाय के कई प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने बताया कि इस शिविर का नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत हो रहा है, ताकि शोषित और पिछड़े वर्ग को जनकल्याणकारी योजनाओं का 100% लाभ मिल सके।
पॉइंट्स में जानिए, जनजातीय समाज के लिए क्यों खास है यह चिंतन शिविर:
हर वर्ग का होगा सर्वांगीण विकास
इस शिविर का सबसे बड़ा संदेश ‘अंत्योदय’ है। यानी योजनाओं का लाभ सिर्फ शहरों तक सीमित न रहकर सुदूर जंगलों और गांवों में रहने वाले उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, जो अब तक इससे वंचित रहा है। जब अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति शिखर पर पहुंचेगा, तभी देश का असली विकास होगा।
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