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Saphala Ekadashi 2025 Date: 14 या 15 दिसंबर, कब है सफला एकादशी? असमंजस खत्म, नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली/धर्म डेस्क:साल 2025 के पौष माह के कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी (Saphala Ekadashi) को लेकर भक्तों के बीच तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चूंकि एकादशी तिथि 14 दिसंबर की शाम से ही शुरू हो रही है, इसलिए लोग कंफ्यूज हैं कि व्रत 14 को रखा जाए या 15 दिसंबर को।

शास्त्रों और उदया तिथि के नियमानुसार, इस बार सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) को रखा जाएगा।यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से हर कार्य में ‘सफलता’ प्राप्त होती है।

सफला एकादशी 2025: सही तारीख (Correct Date)
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर की शाम को हो रही है, लेकिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि 15 दिसंबर को रहेगी।हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों के लिए ‘उदया तिथि’ (सूर्योदय के समय वाली तिथि) ही मान्य होती है।

  • व्रत की तारीख: 15 दिसंबर 2025, सोमवार

शुभ मुहूर्त और तिथि का समय (Tithi Timings)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 दिसंबर 2025, शाम 06:49 बजे से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 15 दिसंबर 2025, रात 09:19 बजे तक
  • पूजा का समय: 15 दिसंबर को सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है।

व्रत पारण का समय (Parana Time)
व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है।

  • पारण की तारीख: 16 दिसंबर 2025, मंगलवार
  • पारण का समय: सुबह 07:07 बजे से सुबह 09:11 बजे के बीच।
    (ध्यान रहे कि पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए।)

सफला एकादशी का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है ‘सफला’ यानी सफल करने वाली। माना जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं, उनके सभी रुके हुए काम पूरे होते हैं और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

पूजा विधि संक्षिप्त में:

  1. 15 दिसंबर की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
  3. भगवान को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें (विष्णु पूजा में तुलसी अनिवार्य है)।
  4. ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और सफला एकादशी व्रत कथा सुनें।
  5. दिन भर निर्जला या फलाहारी व्रत रखें और अगले दिन (16 दिसंबर) शुभ मुहूर्त में पारण करें।
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