बद्री तुलसी: धार्मिक आस्था के साथ अब बदलेगी स्थानीय किसानों की किस्मत, व्यावसायिक खेती की तैयारी शुरू

देहरादून/बदरीनाथ: बदरीनाथ धाम के आसपास प्राकृतिक रूप से उगने वाली और भगवान विष्णु के प्रिय ‘बद्री तुलसी’ को लेकर एक बड़ी और उत्साहजनक खबर है। अब तक केवल जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर प्राकृतिक रूप से मिलने वाली इस दिव्य तुलसी की अब पहली बार व्यावसायिक खेती (Commercial Farming) की जाएगी। सगंध पौध केंद्र (CAP), सेलाकुई ने इस दिशा में एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है।

धार्मिक आस्था के साथ अब आर्थिक मजबूती का आधार

बद्री तुलसी का न केवल विशेष धार्मिक महत्व है, बल्कि यह औषधीय गुणों का खजाना भी है। इसे साक्षात भगवान विष्णु का रूप माना जाता है और बदरीनाथ मंदिर में पूजा व प्रसाद के रूप में इसकी माला अनिवार्य रूप से चढ़ाई जाती है। अब इसकी खेती से स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ाने की तैयारी है।

योजना की मुख्य बातें:

  • नर्सरी तैयार: सेलाकुई स्थित सगंध पौध केंद्र ने पहली बार बद्री तुलसी के बीजों से नर्सरी तैयार की है।
  • 50 हजार पौधों का लक्ष्य: इस वर्ष स्थानीय काश्तकारों को खेती के लिए 50,000 पौधे वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • मिलेगा रोजगार: व्यावसायिक खेती से चमोली और बदरीनाथ क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

अब खराब नहीं होगी तुलसी, ‘अर्क’ के रूप में मिलेगी सौगात

अक्सर बदरीनाथ आने वाले श्रद्धालु प्रसाद के रूप में तुलसी की कच्ची पत्तियां साथ ले जाते हैं, लेकिन नमी के कारण उनमें फंगस लग जाता है और वे खराब हो जाती हैं।
समाधान: सगंध पौध केंद्र अब बद्री तुलसी की पत्तियों से ‘अर्क’ तैयार करने जा रहा है। श्रद्धालु इस अर्क को ‘गंगाजल’ की तरह लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और इसका उपयोग औषधीय व धार्मिक कार्यों में कर सकेंगे।

सेहत के लिए वरदान है बद्री तुलसी

विशेषज्ञों के अनुसार, बद्री तुलसी में प्रचुर मात्रा में एंटी-बायोटिक तत्व पाए जाते हैं। इसका उपयोग निम्नलिखित समस्याओं में रामबाण माना जाता है:

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाना।
  • पाचन तंत्र को सुधारना और तनाव कम करना।
  • सर्दी-खांसी, मलेरिया और त्वचा में निखार लाना।

सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान ने बताया, “बद्री तुलसी धार्मिक और औषधीय गुणों से भरपूर है। पहली बार इसकी नर्सरी तैयार की जा रही है ताकि इसे व्यावसायिक रूप दिया जा सके। हमारा लक्ष्य स्थानीय लोगों की आय बढ़ाना और इस बहुमूल्य संपदा का संरक्षण करना है।”

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