चमोली (उत्तराखंड),: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितता का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मामले की जांच के लिए शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति और पुलिस दोनों ही स्तरों पर पड़ताल तेज कर दी गई है. इस बीच, मुख्य आरोपी और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निलंबित व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
चर्चाएं तेज हैं कि प्रमोद नौटियाल पुलिस गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) की शरण में जा सकते हैं. हालांकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही अदालत में किसी अग्रिम जमानत याचिका की जानकारी सामने आई है.
बीकेटीसी (BKTC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल से किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो पा रहा है. वे कार्यालय भी नहीं आ रहे हैं और उनका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है. उन्होंने बताया कि प्रमोद नौटियाल ने अवकाश (लीव) के लिए आवेदन जरूर किया था, लेकिन उनके अवकाश आवेदन को स्वीकृत नहीं किया गया था.
चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही टीमें मंदिर समिति के दस्तावेजों की पड़ताल के साथ-साथ उसकी भौतिक संपत्तियों का सत्यापन भी कर रही हैं:
बदरीनाथ धाम के गर्भगृह और दान स्थल में चढ़ावे की गिनती के दौरान हेराफेरी का मामला हिंदूवादी संगठन ‘भैरव सेना’ द्वारा उठाए जाने के बाद प्रकाश में आया था. संगठन ने आरोप लगाया था कि मंदिर के कुछ कर्मचारी चढ़ावे के पैसों को गिनती के समय गायब कर रहे हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब दान स्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई. फुटेज में वे सामान्य गिनती प्रक्रिया के इतर कुछ नकदी छिपाते नजर आए थे. इसके बाद तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया गया और पुलिस ने बीकेटीसी की शिकायत पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 (चोरी) और 316(5) (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
इसके साथ ही शासन ने इस मामले की गहन जांच के लिए गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है.
इस विवाद को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कड़ा रुख अख्तियार कर चुके हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बदरीनाथ धाम करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था और श्रद्धा का केंद्र है और यहां किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके.
इधर, इस मामले को लेकर प्रदेश में सियासत भी गरमा गई है. विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मांग की है कि कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच या तो हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए या फिर इसके लिए एक सर्वदलीय विधानसभा समिति का गठन किया जाए. इसके अतिरिक्त, बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए पूरे प्रकरण की एसआईटी (SIT) जांच कराने की मांग की है.
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