UTTARAKHAND

ग्लोबल टूरिज्म हब बनेगी टिहरी झील: सोलर पावर से चलेंगे प्लांट, ट्रेडिशनल विलेज के रूप में संवरेंगे गांव

मुख्य बातें :

  • सरल और आकर्षक ब्रांडिंग: टिहरी झील प्रोजेक्ट के लिए तय होगा एक ऐसा सरल नाम, जो आसानी से लोगों की जुबान पर चढ़ सके और इसकी वैश्विक पहचान बने.
  • विरासत को सम्मान: पुरानी टिहरी के राजशाही इतिहास, लोक कला और संस्कृति को दिखाने के लिए बनेगा अत्याधुनिक संग्रहालय.
  • पर्यावरण हितैषी विकास: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हरित मॉडल पर होगा विकास; झील की वहन क्षमता का होगा वैज्ञानिक अध्ययन.
  • ट्रेडिशनल विलेज: आसपास के गांवों को पारंपरिक थीम पर संवारा जाएगा ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका और रोजगार के अवसर बढ़ें.

देहरादून, उत्तराखंड सरकार ने टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र (Global Tourism Destination) के रूप में विकसित करने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं. इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल और नवीकरणीय ऊर्जा (Green Energy) आधारित मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है.

इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक में परियोजना की रूपरेखा तय की गई. बैठक में पर्यटन को स्थानीय संस्कृति, आजीविका और सतत विकास (Sustainable Development) से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए.

प्रोजेक्ट का होगा आकर्षक नाम, THDC के एमडी और टिहरी डीएम भी कमेटी में शामिल

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टिहरी झील परियोजना की विशिष्ट ब्रांडिंग के लिए एक सरल और प्रभावी नाम तय किया जाए. इसके साथ ही, परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन और सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए टिहरी जल विद्युत विकास निगम (THDC) के प्रबंध निदेशक (MD) को समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में और जिलाधिकारी (DM) टिहरी को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया है.

सोलर एनर्जी से संचालित होगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)

परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल और हरित ऊर्जा पर आधारित मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है:

  • टिहरी झील क्षेत्र में प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित करने की योजना है.
  • इसके लिए क्षेत्र में सोलर प्लांट स्थापित करने की व्यवहार्यता (feasibility) का अध्ययन कराया जाएगा, जिससे यह परियोजना पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण का एक आदर्श उदाहरण बन सके.

ट्रेडिशनल विलेज के रूप में विकसित होंगे आसपास के गांव

बैठक में पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण आजीविका को एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया गया:

  • पारंपरिक थीम: टिहरी झील के आसपास के चयनित गांवों को उत्तराखंड की पारंपरिक कला, लोक विरासत और हस्तशिल्प की थीम पर ‘ट्रेडिशनल विलेज’ के रूप में विकसित किया जाएगा.
  • रोजगार सृजन: इन गांवों को केवल पर्यटन केंद्र बनाने के बजाय स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार से जोड़ने की योजना है. इस आजीविका मॉडल को भविष्य में राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी लागू करने की तैयारी है.

3डी मॉडल से सैलानी देख सकेंगे जलमग्न हुई पुरानी टिहरी

टिहरी के गौरवशाली और ऐतिहासिक महत्व को सैलानियों के सामने जीवंत करने के लिए एक विशेष संग्रहालय (Museum) तैयार किया जाएगा:

  • इस संग्रहालय की थीम में पुरानी टिहरी के राजशाही इतिहास, लोक कला, लोक संस्कृति और क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा.
  • सबसे खास बात यह होगी कि पानी में समा चुकी पुरानी टिहरी के स्वरूप से पर्यटकों को रूबरू कराने के लिए संग्रहालय में त्रि-आयामी (3D) मॉडल स्थापित किया जा सकता है.

वैज्ञानिक आधार पर संचालित होंगी बोटिंग और जल पर्यटन गतिविधियां

झील में बोटिंग, जेटी संचालन और अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियों के विस्तार को वैज्ञानिक और सुरक्षित आधार पर विकसित किया जाएगा:

  • विशेषज्ञ टीमों द्वारा टिहरी झील की वहन क्षमता (Carrying Capacity) का वैज्ञानिक अध्ययन कर यह आकलन किया जाएगा कि किस सीमा तक जल पर्यटन गतिविधियों का सुरक्षित संचालन संभव है.
  • इसी वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर संपूर्ण मास्टर प्लान (Master Plan) तैयार किया जाएगा. विकास कार्य चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे, लेकिन पूरी कार्ययोजना एक साथ तैयार की जाएगी.

संचालन में आत्मनिर्भरता की तैयारी

परियोजना के अंतर्गत विकसित होने वाली सभी संपत्तियों के संचालन और रखरखाव की दीर्घकालिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. इसके लिए परियोजना में ऐसी आय सृजन गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे भविष्य में ये संपत्तियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर तरीके से संचालित हो सकें और स्थानीय हितधारकों की भी लगातार भागीदारी बनी रहे.

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