UTTARAKHAND

उत्तरकाशी: हर्षिल पहुंचे सीडीएस अनिल चौहान, ‘सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र’ का किया शिलान्यास; बोले- सेना और सीमांत ग्रामीण एक-दूसरे के पूरक

उत्तरकाशी: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान आज उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सीमांत क्षेत्र हर्षिल के दौरे पर पहुंचे। यहाँ उन्होंने केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत भारतीय सेना द्वारा विकसित किए जाने वाले ‘हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र का विधि-विधान से शिलान्यास किया। इस दौरान सीडीएस ने स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और अनुभवों को भी साझा किया।

सीमांत ग्रामीण और सेना का गहरा रिश्ता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सीमांत गांवों के लोग और सेना एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा, “बॉर्डर पर रहने वाले स्थानीय लोग विपरीत परिस्थितियों में भी सेना की मदद करते हैं, इसलिए यह सेना का नैतिक कर्तव्य है कि वह इन दुर्गम क्षेत्रों के विकास में अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करे।”

उन्होंने विश्वास जताया कि हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र न केवल क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करेगा, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। इस केंद्र के माध्यम से देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक हर्षिल घाटी के गौरवशाली इतिहास, स्थानीय जीवनशैली और यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू हो सकेंगे।

सादगी ने जीता ग्रामीणों का दिल

दौरे के दौरान सीडीएस अनिल चौहान की सादगी चर्चा का विषय रही। उन्होंने बिना किसी तामझाम के स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और एनसीसी कैडेट्स से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों से स्थानीय परिदृश्य और क्षेत्र की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

इसके बाद वे बगोरी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर सीमावर्ती क्षेत्रों की जीवंतता बनाए रखने में उनके योगदान की सराहना की। सीडीएस ने मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव जाकर विशेष पूजा-अर्चना भी की और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

क्या है हर्षिल सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र का उद्देश्य?

  • संस्कृति का संरक्षण: गंगोत्री, हर्षिल और गढ़वाल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना।
  • पर्यटन को बढ़ावा: पर्यटकों को इस क्षेत्र के इतिहास और प्रकृति की जानकारी देना।
  • रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • सुरक्षा और सहभागिता: सेना और नागरिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना।

उत्तराखंड के सपूत हैं जनरल अनिल चौहान

बता दें कि सीडीएस जनरल अनिल चौहान मूल रूप से उत्तराखंड के ही रहने वाले हैं। उनका पैतृक गांव पौड़ी जिले का गवांणा है। वह भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल से संबंध रखते हैं। जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद, 30 सितंबर 2022 को उन्होंने देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में पदभार संभाला था।

हर्षिल पहुंचने पर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) प्रशांत आर्य और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरे से सीमांत क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के प्रति एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

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