उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कमर कस ली है। सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ईंधन की आपूर्ति में कोई चुनौती आती है, तो ‘प्लान-बी’ के तहत वन निगम लकड़ी की सप्लाई सुनिश्चित करेगा।
देहरादून | उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर धामी सरकार पूरी तरह ‘अलर्ट मोड’ पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर लिया गया।
गैस की कमी हुई तो वन निगम देगा लकड़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने ‘प्लान-बी’ तैयार रखा है। अगर यात्रा के दौरान ईंधन या रसोई गैस की किल्लत होती है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर वन निगम जलाऊ लकड़ी की सप्लाई करेगा। इसके लिए यात्रा मार्गों पर विशेष स्थान चिन्हित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को भोजन बनाने में समस्या न आए।
मुख्यमंत्री के 5 बड़े निर्देश:
‘चारधाम यात्रा राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार’
सीएम धामी ने कहा, “चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारे राज्य की आस्था, अर्थव्यवस्था और पर्यटन की रीढ़ है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करें ताकि उत्तराखंड की छवि वैश्विक पटल पर और बेहतर हो।”
विदेशी संकट का असर नहीं होने देगी सरकार
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, लेकिन सरकार ने पहले ही अग्रिम योजना (Advance Planning) बना ली है। पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई चैन को दुरुस्त रखने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित कर दिया गया है।
TV10 INDIA इनसाइट: उत्तराखंड में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) पहुंचते हैं। इस बार सरकार का फोकस न केवल सुविधाओं पर है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यात्रा को निर्बाध रूप से चलाने पर भी है।
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