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हरिद्वार पहुंचे शंकराचार्य: कल बदरीनाथ की ‘गाडू घड़ा’ यात्रा में होंगे शामिल; बोले- चारधाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन का फैसला सही

हरिद्वार | महाकुंभ विवाद के बाद पहली बार उत्तराखंड पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में उन्होंने चारधाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने दो टूक कहा कि चारधाम केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था के केंद्र हैं; यहाँ केवल उन्हीं को आना चाहिए जिनकी इस धर्म में अटूट श्रद्धा हो।

‘विरुद्ध प्रकृति के लोग आएंगे तो वातावरण बिगड़ेगा’

शंकराचार्य ने कहा कि चारधाम यात्रा को ‘कौतूहल’ (मजे) की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह परंपरा रही है कि जहाँ जिनकी आस्था हो, वही वहाँ आएं। यदि विरुद्ध प्रकृति के लोग (जिनकी आस्था नहीं है) इन पवित्र स्थानों पर आएंगे, तो वहां का आध्यात्मिक वातावरण खराब होगा। प्रशासन ने जो नियम बनाए हैं, वे उचित हैं।”

कुंभ के निमंत्रण पर तंज: ‘अखाड़े और सरकार अब शंकराचार्य को नहीं पूछते’

जब शंकराचार्य से हरिद्वार कुंभ मेले के निमंत्रण के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कड़वे लहजे में कहा, “आजकल सरकार और अखाड़े मिलकर ही कुंभ और अर्द्धकुंभ का आयोजन कर लेते हैं, वे शंकराचार्यों से पूछना जरूरी नहीं समझते। जब सब कुछ खुद ही कर रहे हैं, तो मेरा इस विषय से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, निमंत्रण मिलता है तो स्वागत है।”

बदरीनाथ की ‘गाड़ू घड़ा’ परंपरा में खुद होंगे शामिल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलने से पहले ‘गाड़ू घड़ा’ (तेल कलश) की प्राचीन परंपरा होती है।

  • क्या है परंपरा: टिहरी राजमहल से तिल का तेल निकाला जाता है, जिसे कलश में रखकर ऋषिकेश लाया जाता है।
  • आगे का रूट: बुधवार को यह कलश यात्रा ऋषिकेश से रवाना होगी और ज्योतिर्मठ होते हुए बदरीनाथ पहुंचेगी।
  • महत्व: इसी तेल से बदरीनाथ के गर्भगृह में 6 महीने तक अखंड ज्योति जलती है।
    शंकराचार्य ने कहा कि हर साल उनके प्रतिनिधि इसमें शामिल होते थे, लेकिन इस बार जनभावनाओं के सम्मान में वे स्वयं इस यात्रा में शामिल होंगे।

मिडिल ईस्ट युद्ध पर चिंता: ‘दुनिया बताए न्याय किसके पक्ष में’

मध्य-पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध और भारत पर इसके असर के सवाल पर उन्होंने कहा कि युद्ध में शामिल न होने वाले देशों को इसका नुकसान नहीं झेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक विद्वानों को सामने आकर न्याय और अन्याय के पक्ष को स्पष्ट करना चाहिए।

TV10 INDIA इनसाइट:
शंकराचार्य का यह दौरा धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। एक तरफ उन्होंने ‘गैर-हिंदू बैन’ का समर्थन कर कट्टर हिंदुत्व की लाइन को मजबूती दी है, तो दूसरी तरफ अखाड़ों और सरकार के बीच चल रही तनातनी को भी उजागर कर दिया है। बदरीनाथ की गाड़ू घड़ा यात्रा में उनका स्वयं शामिल होना श्रद्धालुओं के बीच बड़ा संदेश देगा।

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