देहरादून: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सिटीज 2.0’ परियोजना से देहरादून को बाहर कर दिया गया है। इस परियोजना के तहत, चुनिंदा शहरों को कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण के लिए विशेष धनराशि आवंटित की जानी थी। देहरादून के इससे बाहर होने का मतलब है कि शहर को अब इस परियोजना के लिए निर्धारित 119 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्राप्त नहीं होगी।
इस निर्णय का असर देहरादून के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर पड़ेगा, जिसके तहत शहर को 2027 तक स्वच्छ और सुंदर बनाने की योजना थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फंड की कमी से शहर में कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण के प्रोजेक्ट्स पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, देहरादून स्मार्ट सिटी के अधिकारियों का कहना है कि इस बाहर होने से मौजूदा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि जून तक सभी पेंडिंग स्मार्ट सिटी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे और कुछ प्रोजेक्ट्स जैसे इलेक्ट्रिक बसें, स्मार्ट टॉयलेट्स, और ग्रीन बिल्डिंग्स के काम अगले 5-10 वर्षों तक जारी रहेंगे।
इस घटनाक्रम से देहरादून के निवासियों में निराशा की लहर है, खासकर उनमें जो पहले से ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधूरे कामों से परेशान थे। शहर की सड़कों पर गड्ढे और अधूरी लाइटिंग जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जिससे जनता की नाराजगी और बढ़ सकती है।
इस विकास के बावजूद, देहरादून के अधिकारी आश्वस्त करते हैं कि शहर के पार्कों, सड़कों, और नालियों की बेहतर व्यवस्था के लिए काम जारी रहेगा। इस तरह, देहरादून के स्मार्ट सिटी के सपने को अभी भी जीवित रखा जा सकता है।
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