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पद्म पुरस्कार 2024: उत्तराखंड के प्रतिष्ठित इतिहासकार यशवंत सिंह कठोच को पद्मश्री से सम्मानित किया गया

उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. यशवंत सिंह कठोच को आज पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने 33 वर्षों तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दी हैं। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में लंबे समय से योगदान दे रहे हैं।

देहरादून:उत्तराखंड के विख्यात इतिहासकार यशवंत सिंह कठोच को वर्ष 2024 के पद्म पुरस्कारों में पद्मश्री से नवाजा गया है। उनकी अद्वितीय योगदान और भारतीय इतिहास के प्रति उनकी अनुपम सेवा के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। यशवंत सिंह कठोच ने अपने शोध कार्यों और लेखन के माध्यम से उत्तराखंड के साथ-साथ भारतीय इतिहास के कई अनछुए पहलुओं को उजागर किया है। उनकी पुस्तकें और शोध पत्र इतिहास के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुकी हैं।

यशवंत सिंह कठोच ने उत्तराखंड के इतिहास पर व्यापक शोध किया है, जिसमें राज्य की सांस्कृतिक विरासत, परंपराएं, और इतिहास के महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत वर्णन है उन्होंने कई पुस्तकें और लेख प्रकाशित किए हैं जो भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं।शिक्षा और मार्गदर्शन उन्होंने अनेक छात्रों को शिक्षित किया है और उनका मार्गदर्शन किया है, जिससे वे भारतीय इतिहास के अध्ययन में आगे बढ़ सकें। उन्होंने सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया है।

यशवंत सिंह कठोच का कार्य और समर्पण न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणा है। पद्मश्री सम्मान उनके अथक प्रयासों और उनकी उत्कृष्टता का प्रतीक है।

प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. यशवंत सिंह कठोच के बारे में खास बातें:

उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. यशवंत सिंह कठोच को आज पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने 33 वर्षों तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दी हैं। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में लंबे समय से योगदान दे रहे हैं।डॉ. कठोच पौड़ी जनपद के एकेश्वर विकासखंड स्थित मांसों गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने 1974 में आगरा विवि से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति तथा पुरातत्व विषय में विवि में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 1978 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के गढ़वाल हिमालय के पुरातत्व पर शोध ग्रंथ प्रस्तुत किया और विवि ने उन्हें डीफिल की उपाधि से नवाजा। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने 33 साल सेवाएं दीं। वर्ष 1995 में वह प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए।

डॉ. कठोच भारतीय संस्कृति, इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में निरंतर शोध कर रहे हैं। वह वर्ष 1973 में स्थापित उत्तराखंड शोध संस्थान के संस्थापक सदस्य हैं। उनकी मध्य हिमालय का पुरातत्व, उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, संस्कृति के पद-चिन्ह, मध्य हिमालय की कला: एक वास्तु शास्त्रीय अध्ययन, सिंह-भारती सहित 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जबकि इतिहास तथा संस्कृति पर निबंध और मध्य हिमालय के पुराभिलेख पुस्तकें जल्द प्रकाशित होंगी।

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