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रिस्पना नदी पुनर्जीवन: देहरादून डीएम ने दिए 15 किमी क्षेत्र के ड्रोन सर्वे के निर्देश, समन्वय के लिए बनेगी विशेष टास्क फोर्स

अतिक्रमण और प्रदूषण की मार झेल रही ऐतिहासिक रिस्पना नदी के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने तैयार की शॉर्ट व लॉन्ग टर्म योजना; जनसहभागिता पर रहेगा जोर।

देहरादून: कभी देहरादून की प्राकृतिक धरोहर और पहचान रही रिस्पना नदी को प्रदूषण, अतिक्रमण और अनियोजित विकास के प्रभावों से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए विभिन्न विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा।

कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि रिस्पना नदी का

पुनर्जीवन केवल एक सरकारी परियोजना नहीं है, बल्कि यह जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय अभियान है।

उन्होंने कहा कि इसकी सफलता के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।

15 किलोमीटर क्षेत्र का होगा ड्रोन सर्वे

नदी को प्रदूषित करने वाले स्रोतों की पहचान के लिए नगर निगम को रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर लंबे क्षेत्र का ड्रोन और स्ट्रेचवार सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके जरिए नदी में गिरने वाले सभी गंदे नालों और कूड़ा डंपिंग स्थलों (गार्बेज पॉइंट्स) को चिन्हित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने प्रत्येक चिन्हित स्थल के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार कर सात दिनों के भीतर विस्तृत प्रस्ताव सौंपने को कहा है।

विभागीय समन्वय के लिए बनेगी टास्क फोर्स

अभियान में कई विभागों की संलिप्तता को देखते हुए बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह को एक प्रभावी टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश दिया गया है। यह टास्क फोर्स नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच पुल का काम करेगी और कार्यों की प्रगति की निगरानी करेगी।

हरित पट्टी, घाट और तकनीकी संतुलन पर ध्यान

प्रशासन की योजना केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा:

  • सिंचाई विभाग: नदी के किनारे घाटों के निर्माण और सार्वजनिक उपयोग के लिए स्थलों को विकसित करने की रूपरेखा तैयार करेगा।
  • वन विभाग: पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए नदी तटों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर ‘हरित पट्टी’ (Green Belt) विकसित करेगा।
  • लोक निर्माण विभाग (PWD): क्षेत्र में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के पिलर्स और अन्य निर्माण कार्यों का इस तरह तकनीकी प्लान तैयार करेगा जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान न पहुंचे।

शॉर्ट और लॉन्ग टर्म रणनीति पर काम

इस अभियान को दो चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा:

  1. शॉर्ट टर्म (तत्काल प्रभाव): नदी और उसके आसपास जमा कचरे का निस्तारण करना, नए गार्बेज पॉइंट्स बनने से रोकना, प्लास्टिक व कूड़ा फेंकने पर पाबंदी और लोगों में जागरूकता फैलाना।
  2. लॉग टर्म (दीर्घकालिक): घाटों का निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण और जल प्रवाह को बनाए रखने के लिए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने का यह प्रयास देहरादून के पर्यावरणीय भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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