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उत्तराखंड: चीन सीमा की ‘नीती घाटी’ में गूँजेगी धावकों की पदचाप, पहली बार होगा अंतरराष्ट्रीय ‘नीती एक्ट्रीम अल्ट्रा रन’

जोशीमठ: उत्तराखंड का पर्यटन विभाग राज्य के सीमांत क्षेत्रों को साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म) के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। चमोली जिले की दुर्गम और सुंदर ‘नीती घाटी’ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की ‘नीती एक्ट्रीम अल्ट्रा रन’ का आयोजन किया जा रहा है। इस रोमांचक प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है

31 मई और 1 जून को होगा आयोजन
जिला पर्यटन अधिकारी (चमोली), अरविंद गौड़ ने बताया कि इस मेगा इवेंट का आयोजन 31 मई और 1 जून को किया जाएगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य चमोली के सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को नई ऊंचाई देना है।

प्रतियोगिता की श्रेणियाँ और रूट की जानकारी:
यह आयोजन चार अलग-अलग श्रेणियों में बंटा होगा:

  1. 75 किमी अल्ट्रा मैराथन: यह केवल भारतीय धावकों के लिए है। यह दौड़ 4340 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रिमखिम से शुरू होकर सुमना, नीती गांव होते हुए मलारी में संपन्न होगी। इसे पूरा करने के लिए 14 घंटे का समय निर्धारित है।
  2. 42 किमी मैराथन: यह 3100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मलारी से शुरू होकर 3600 मीटर ऊंचे नीती गांव तक जाएगी और वापस मलारी में समाप्त होगी। इसके लिए 8 घंटे का समय दिया गया है। इसमें विदेशी धावक भी भाग ले सकेंगे।
  3. 21 किमी और 5 किमी दौड़: 1 जून को 21 किमी की दौड़ और 5 किमी की ‘ओपन कैटेगरी’ दौड़ का आयोजन होगा। 5 किमी की दौड़ में किसी भी आयु वर्ग के महिला-पुरुष हिस्सा ले सकेंगे।

पंजीकरण और पात्रता की शर्तें:
सुरक्षा और तकनीकी मानकों को देखते हुए धावकों के लिए विशेष पात्रता शर्तें रखी गई हैं:

  • 75 किमी के लिए: केवल भारतीय नागरिक ही पात्र हैं (क्योंकि विदेशी नागरिकों को इनर लाइन परमिट नहीं मिलता)। प्रतिभागी के पास पिछले 10 महीनों में 42 किमी दौड़ या 6 महीने में दो 21 किमी दौड़ पूरा करने का अनुभव होना चाहिए। आदि कैलाश अल्ट्रा रन या पिछले एक साल में कोई भी अल्ट्रा रन पूरी करने वाले धावक भी पात्र हैं।
  • 42 किमी के लिए: इसमें भाग लेने के लिए पिछले छह महीने में उच्च हिमालयी क्षेत्र में 21 किमी दौड़ या 10 महीने में दो हाफ मैराथन पूरा करने का प्रमाण पत्र अनिवार्य है।

प्रशासन की तैयारियां
पर्यटन विभाग ने इस आयोजन के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीमांत क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और धावकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

यह अल्ट्रा रन न केवल धावकों के लिए शारीरिक चुनौती होगी, बल्कि सीमावर्ती गांवों के निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी लेकर आएगी।

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