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Uttarakhand:पदोन्नति छोड़ने पर अब मिलेगा अगले पात्र को लाभ, शिक्षा विभाग में प्रभारी व्यवस्था होगी कम

देहरादून: प्रदेश के शिक्षा विभाग में हर साल शिक्षक और कर्मचारी अपनी सुविधाजनक तैनाती के लिए पदोन्नति को छोड़ देते थे, लेकिन अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। नए नियम के तहत यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी पदोन्नति को अस्वीकार करता है, तो इसका लाभ चयन सूची में अगले पात्र व्यक्ति को दिया जाएगा। इससे विभागों में प्रभारी व्यवस्था कम होगी और पदों को लंबे समय तक खाली नहीं रखा जाएगा।

देहरादून समेत चार जिलों में सबसे अधिक मामले

देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर वे प्रमुख जिले हैं, जहां शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी अक्सर पदोन्नति छोड़ देते हैं। इसकी वजह से कई बार महत्वपूर्ण पद तीन साल तक खाली रह जाते हैं। कुछ अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

शिक्षा विभाग में इस साल भी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक के पदों पर पदोन्नति की गई थी। जिला स्तर से होने वाली इन पदोन्नतियों के बाद कुछ शिक्षकों ने पदोन्नति छोड़ दी।

पदोन्नति छोड़ने पर अब मिलेगा अगले पात्र को लाभ, शिक्षा विभाग में प्रभारी व्यवस्था होगी कम

प्रदेश के शिक्षा विभाग में हर साल शिक्षक और कर्मचारी अपनी सुविधाजनक तैनाती के लिए पदोन्नति को छोड़ देते थे, लेकिन अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। नए नियम के तहत यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी पदोन्नति को अस्वीकार करता है, तो इसका लाभ चयन सूची में अगले पात्र व्यक्ति को दिया जाएगा। इससे विभागों में प्रभारी व्यवस्था कम होगी और पदों को लंबे समय तक खाली नहीं रखा जाएगा।

देहरादून समेत चार जिलों में सबसे अधिक मामले

देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर वे प्रमुख जिले हैं, जहां शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी अक्सर पदोन्नति छोड़ देते हैं। इसकी वजह से कई बार महत्वपूर्ण पद तीन साल तक खाली रह जाते हैं। कुछ अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

पदोन्नति छोड़ने के पीछे वजह

अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल ने बताया कि विभाग में तय समय पर पदोन्नति न होने से शिक्षक पदोन्नति वेतनमान तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन पदोन्नति का वित्तीय लाभ उन्हें नहीं मिलता। इसके अलावा, पदोन्नति के बाद उन्हें दुर्गम क्षेत्रों में भेज दिया जाता है, जिससे उनका गृहकर कम हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, देहरादून के शिक्षक को चकराता या कालसी जैसे दुर्गम क्षेत्र में तैनाती मिलती है, जिससे वह पदोन्नति लेने से कतराते हैं।

नए नियम के तहत बदलाव

कार्मिक विभाग के अपर सचिव ललित मोहन रयाल ने बताया कि ‘राज्याधीन सेवाओं में पदोन्नति का परित्याग नियमावली 2024’ में बदलाव किया गया है। अब यदि कोई कर्मचारी या शिक्षक पदोन्नति छोड़ता है, तो अगले पात्र को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, शिक्षक या कर्मचारी को पदभार संभालने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि वह इस दौरान पदभार ग्रहण नहीं करता, तो उसकी पदोन्नति पर दोबारा विचार नहीं किया जाएगा।

पहले की स्थिति

पहले कर्मचारी को तीन बार पदोन्नति छोड़ने का मौका मिलता था, जिससे पद लंबे समय तक खाली रहते थे और कार्यवाहक व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ जाती थी। यह न केवल विभागीय कामकाज को प्रभावित करता था, बल्कि पदों की गरिमा भी कम होती थी।

नए नियम से उम्मीदें

नए नियमों के लागू होने से शिक्षा विभाग समेत अन्य विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया में सुधार होगा। साथ ही, प्रभारी व्यवस्था में कमी आने से प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी।

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