
देहरादून/हरिद्वार। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी को नए पंख लगने वाले हैं। गंगा एक्सप्रेस-वे को अब सीधे धर्मनगरी हरिद्वार तक विस्तारित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता पत्र (MoU) पर सहमति बन गई है।
दोनों राज्यों के बीच हुए इस समझौते में दोनों सरकारों की भूमिका और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय कर दी गई हैं। इस निर्माण कार्य से उत्तराखंड पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
4 बड़ी बातें
- रूट और लंबाई: यह नया विस्तारित मार्ग उत्तर प्रदेश के बिजनौर से होते हुए हरिद्वार तक आएगा, जिसकी कुल लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।
- नो फाइनेंशियल बर्डन: इस पूरे 30 किमी रूट के निर्माण का वित्तीय भार उत्तराखंड राज्य पर नहीं पड़ेगा।
- उत्तराखंड की भूमिका: धामी सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए केवल भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और यूटिलिटी शिफ्टिंग (Utility Shifting) में प्रशासनिक सहयोग करेगी।
- कैबिनेट की मुहर: विचलन (Deviation) के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच हुए इस समझौते को उत्तराखंड कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी भी मिल चुकी है।
यूपी सरकार के पास निर्माण की कमान
गंगा एक्सप्रेस-वे के इस विस्तार निर्माण की मुख्य जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) के पास है। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और शासन स्तर पर पिछले महीने हुई बैठकों के बाद इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया था। हरिद्वार जिला प्रशासन के साथ भी इस संबंध में समीक्षा बैठकें पूरी की जा चुकी हैं।
समझिए: प्रोजेक्ट में दोनों राज्यों का रोल
| राज्य | जिम्मेदारी / भूमिका |
| उत्तर प्रदेश | प्रोजेक्ट का पूरा वित्तीय प्रबंधन, निर्माण कार्य एवं संचालन। |
| उत्तराखंड | अपनी सीमा में जमीन अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग व स्थानीय प्रशासनिक सहायता। |
क्या होगा आम जनता और राज्य को फायदा?
- धार्मिक पर्यटन को रफ्तार: प्रयागराज और पश्चिमी यूपी से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरिद्वार पहुंचना बेहद आसान, सुगम और समय बचाने वाला होगा।
- औद्योगिक निवेश और व्यापार: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा, जिससे औद्योगिक कॉरिडोर को गति मिलेगी।
- रोजगार के अवसर: एक्सप्रेस-वे के किनारे ढाबे, पेट्रोल पंप, लॉजिस्टिक्स हब और टूरिज्म सेंटर्स विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंग।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों राज्यों के बीच हुए इस ऐतिहासिक करार के बाद अब भूमि चिंहाकन और धरातलीय सर्वेक्षण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
