- सराय गांव के एक घर में मची दहशत, टैंक का ढक्कन खोलते ही उड़े परिजनों के होश
- गर्मी से बचने के लिए मादा सांप ने पानी की टंकी में दिए थे अंडे, सभी को सुरक्षित जंगल में छोड़ा

हरिद्वार।
हरिद्वार के सराय गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक घर के पानी के टैंक में अचानक दर्जनों सांप के बच्चे दिखाई दिए। रोज की तरह जब परिवार के सदस्य ने पानी के टैंक को खोलकर देखा, तो अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। टैंक के भीतर एक-दो नहीं, बल्कि कुल 27 सांप के बच्चे पानी में तैरते और रेंगते नजर आ रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में सांपों को देखकर पूरे गांव में दहशत फैल गई, जिसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचित किया गया।
मामले से जुड़े मुख्य बिंदु:
- स्थान: सराय ग्राम, हरिद्वार।
- रेस्क्यू संख्या: कुल 27 सांप के बच्चे।
- प्रजाति: कीलबैक (सामान्य भाषा में पानी का सांप)।
- रेस्क्यू टीम: वन विभाग की क्यूआरटी (QRT) और स्नेक कैचर तालिब व भोला।
सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) मौके पर पहुंची। टीम के साथ आए एक्सपर्ट स्नेक कैचर तालिब और भोला ने बिना देरी किए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। संकरे टैंक से सांपों को निकालना आसान नहीं था, लेकिन दोनों ने कड़ी मशक्कत के बाद सूझबूझ से काम लिया और एक-एक कर सभी 27 सांप के बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस अनोखे रेस्क्यू को देखने के लिए मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस रेस्क्यू का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
रेंज अधिकारी शीशपाल सिंह ने बताया कि रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे ‘कीलबैक’ प्रजाति के हैं। इन्हें सामान्य बोलचाल में ‘पानी का सांप’ कहा जाता है। यह मुख्य रूप से तालाबों, नदियों और नहरों के आसपास नमी वाले स्थानों पर पाए जाते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, गर्मी बढ़ने के कारण सांप जैसे रेंगने वाले जीव ठंडे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले इलाकों में घुस जाते हैं। आशंका है कि किसी मादा सांप ने पानी के इस टैंक को सुरक्षित और ठंडा मानकर वहां अंडे दे दिए थे, जिनसे निकले ये बच्चे काफी समय से इसी टैंक के अंदर रह रहे थे।
वन विभाग ने सभी सांपों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक वास (जंगल) में छोड़ दिया है। रेंज अधिकारी ने जनता से अपील की है कि गर्मी के मौसम में घरों के आसपास सांप या कोई अन्य वन्यजीव दिखने पर घबराएं नहीं और न ही उन्हें कोई नुकसान पहुंचाएं। ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
