हरिद्वार: हरिद्वार में कांवड़ यात्रा रूट पर ढाबों पर नाम लिखकर पहचान बताने वाले विवाद के बाद एक और प्रशासनिक निर्णय ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बार कांवड़ रूट पर पड़ने वाले मस्जिद और मजारों को त्रिपाल से ढक दिया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने दोपहर बाद मस्जिदों और मजारों से पर्दा हटा लिया। पुलिस के दो जवानों ने पहुंचकर पर्दा हटाया, लेकिन प्रशासन मस्जिदों को ढकने के निर्णय का जवाब नहीं दे पा रहा था।
ज्वालापुर के रामनगर कॉलोनी स्थित मस्जिद और दुर्गा चौक के पास स्थित मजार के गेट पर बड़ा त्रिपाल लगाया गया था। हालांकि, इससे पहले कांवड़ यात्रा के दौरान मस्जिद और मजार को कभी नहीं ढका गया है।
इस निर्णय पर सफाई देते हुए हरिद्वार के प्रभारी और उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, “कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। आप जानते हैं कि जब कुछ नया होता है, तो हम उसे ढक देते हैं। अगर इस तरह से किया गया है तो इसलिए ताकि कोई उकसावे की स्थिति न बने, कोई भड़के नहीं और हमारी कांवड़ यात्रा सुचारू रूप से चले।”
महाराज ने आगे कहा, “इसका ध्यान रखा गया है कि यात्रा में कोई बाधा न आए। ऐसा पहली बार हुआ है। आप जानते हैं कि जब भी निर्माण होता है, तो उसे भी ढक दिया जाता है, इसलिए ऐसा किया गया है।”
मौलाना ने प्रशासन पर उठाए सवाल
मजार और मस्जिद के केयरटेकर और मौलाना प्रशासन के इस फैसले से अनजान है। उनका कहना है कि इस संबंध में उनसे कोई बात नहीं की गई है। जबकि कई दशकों से यहां से कांवड़िए गुजर रहे हैं और कावड़िया मजार के बाहर पेड़ की छाया में आराम भी करते हैं। लोग यहां पर पहले चाय-पानी भी करते थे।
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