
मुख्य बिंदु (Highlights):
- तिथि: सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी।
- शुभ योग: पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य और गजकेसरी सहित कई दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है।
- सूर्य ग्रहण: 12 अगस्त को रात 09:04 बजे साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगेगा।
- वृक्षारोपण का महत्व: इस दिन पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और बेलपत्र का पौधा लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
सावन माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, दान-पुण्य और पौधारोपण (वृक्षारोपण) करने का विशेष विधान है।
हरियाली अमावस्या 2026: तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को सुबह 01:53 बजे से प्रारंभ होकर रात 11:07 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, हरियाली अमावस्या का पर्व 12 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
कई दुर्लभ और शुभ योगों का अद्भुत संयोग
इस बार हरियाली अमावस्या पर एक साथ कई शुभ योग बन रहे हैं:
- शुभ योग: पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, व्यातिपात और वरीयान योग।
- ग्रहों के योग: बुधादित्य योग, गजकेसरी योग, शशि आदित्य योग और चतुर्ग्रही योग का सुंदर संयोग बन रहा है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इन योगों में की गई पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
हरियाली अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:29 बजे से सुबह 05:17 बजे तक।
- अमृत काल मुहूर्त: सुबह 04:36 बजे से सुबह 06:05 बजे तक।
इस अवधि में स्नान ध्यान कर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करना विशेष फलदायी रहेगा।
हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का योग
12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन ही वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा। भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण रात 09:04 बजे से शुरू होगा। रात में होने के कारण यह ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) नहीं होगा, जिसके चलते भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा।
पेड़-पौधे लगाने (पौधारोपण) का विशेष महत्व
हरियाली अमावस्या का संबंध प्रकृति के संरक्षण से भी है। इस दिन पौधा लगाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष शांत होते हैं।
- शुभ पौधे: इस दिन तुलसी, नीम, पीपल, बरगद, बेलपत्र, आंवला और मनी प्लांट जैसे पवित्र पौधे लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
धार्मिक महत्व और पूजा विधि
- शिव-पार्वती पूजा: सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं।
- पितृ तर्पण: तिल, जल और कुश से पितरों के नाम तर्पण करें व जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और छाते का दान करें।
- गृह शांति: मान्यताओं के अनुसार इस दिन भक्तिभाव से पूजन करने से परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
