Dharam Jyotish

Holashtak 2026: आज से शुरू हुए होलाष्टक, अगले 8 दिनों तक मांगलिक कार्यों पर रोक; जानें क्या करें और क्या न करें

नई दिल्ली (धर्म डेस्क): रंगों के त्योहार होली से ठीक आठ दिन पहले की अवधि को हिंदू धर्म में ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। आज यानी 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है, जो 3 मार्च (होलिका दहन) तक जारी रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है।

यद्यपि मांगलिक कार्यों के लिए यह समय शुभ नहीं है, लेकिन आध्यात्मिक और साधना की दृष्टि से इसे अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। आइए जानते हैं होलाष्टक से जुड़े जरूरी नियम और इसके पीछे की धार्मिक वजह।

भूलकर भी न करें ये काम (वर्जित कार्य)

होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र होता है, इसलिए शास्त्रों में निम्नलिखित कार्यों की मनाही है:

  • मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, मुंडन, नामकरण और जनेऊ संस्कार जैसे संस्कार न करें।
  • भवन एवं वाहन: नया घर खरीदना, भूमि पूजन, गृह प्रवेश या नई गाड़ी खरीदना इस अवधि में अशुभ माना जाता है।
  • नया व्यवसाय: किसी भी नए व्यापार या निवेश की शुरुआत होलाष्टक में टाल देनी चाहिए।
  • तामसिक भोजन: इन दिनों मांस-मदिरा और तामसिक चीजों के सेवन से बचना चाहिए।

शुभ फल के लिए क्या करें?

भले ही शुभ कार्य वर्जित हों, लेकिन पूजा-पाठ के लिए यह समय ‘सिद्ध’ माना जाता है:

  • दान-पुण्य: अपनी क्षमतानुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
  • मंत्र जाप: भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें। विशेष रूप से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना जीवन में सकारात्मकता लाता है।
  • साधना: मंत्र साधना और आध्यात्मिक शांति के लिए यह समय श्रेष्ठ है।

क्यों अशुभ माने जाते हैं ये 8 दिन?

इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए गए हैं:

  1. पौराणिक कथा: मान्यताओं के अनुसार, इन्हीं 8 दिनों में भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने भगवान की भक्ति छोड़ने के लिए घोर यातनाएं दी थीं। प्रहलाद के कष्टों के कारण इस समय को शुभ कार्यों के लिए त्याज्य माना गया है।
  2. ज्योतिषीय कारण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन 8 दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे आठों ग्रह अपनी उग्र अवस्था (Aggressive state) में होते हैं। ग्रहों की इस स्थिति के कारण व्यक्ति की निर्णय क्षमता और कार्यों का फल प्रभावित हो सकता है।

 होलाष्टक का समय संयम और साधना का है। यदि आप इन 8 दिनों में नियमों का पालन करते हुए पूजा-पाठ और दान करते हैं, तो यह मानसिक शांति और आगामी त्योहार ‘होली’ के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

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