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देश के ‘गोल्डन ब्वॉय’ जसपाल राणा पंचतत्व में विलीन: काशी के मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, नम आंखों से दी गई विदाई

देहरादून: भारतीय निशानेबाजी (शूटिंग) जगत के सबसे चमकते सितारों में से एक और ‘गोल्डन ब्वॉय’ के नाम से विख्यात पूर्व अंतरराष्ट्रीय शूटर व दिग्गज कोच जसपाल राणा का शनिवार, 13 जून को काशी के मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके 21 वर्षीय बेटे युवराज सिंह राणा ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम क्रियाएं पूरी कीं। 49 वर्ष की अल्पायु में जसपाल राणा का यह असमय निधन खेल जगत और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

राजनाथ सिंह के पुत्रों ने दिया कंधा, राजकीय सम्मान के साथ दी गई विदाई

जसपाल राणा की अंतिम यात्रा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के परिवार की ओर से उनके पुत्र व नोएडा से भाजपा विधायक पंकज सिंह और नीरज सिंह शामिल हुए। पंकज सिंह (जो रिश्ते में जसपाल राणा के बहनोई हैं) और नीरज सिंह ने उनके पार्थिव शरीर को कंधा देकर विदा किया। अंतिम यात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज संदीप कुमार भी उपस्थित रहे।

मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार से पूर्व जसपाल राणा के पार्थिव शरीर को गंगा जल से स्नान कराया गया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (राजकीय सम्मान) दिया।

देहरादून में फूट-फूटकर रोईं स्टार शूटर मनु भाकर

वाराणसी लाए जाने से पहले दिवंगत जसपाल राणा के पार्थिव शरीर को दिल्ली के मैक्स अस्पताल से उनके देहरादून स्थित निवास स्थान पर लाया गया था। वहाँ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके अंतिम दर्शन कर पुष्पचक्र अर्पित किया और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।

इस दौरान, पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली स्टार शूटर मनु भाकर भी अपने गुरु के अंतिम दर्शन करने पहुंचीं। अपने मार्गदर्शक और सबसे करीबी मित्र को खोने के गम में मनु भाकर अत्यंत भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक सकीं।

काशी में अंतिम संस्कार की वजह

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जसपाल राणा की भगवान शिव और मां गंगा के प्रति अटूट आस्था थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही यह इच्छा व्यक्त की थी कि उनके जीवन की अंतिम यात्रा काशी के घाट पर ही पूरी हो। उनकी इसी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए शनिवार को देहरादून से चार्टर प्लेन/एयर एम्बुलेंस के माध्यम से उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी लाया गया था।

जर्मनी से लौटते समय अचानक बिगड़ी थी तबीयत

हाल ही में म्यूनिख (जर्मनी) में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय विमान में ही जसपाल राणा को सीने में गंभीर बेचैनी महसूस हुई थी। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तत्काल साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने हृदय में ब्लॉकेज पाए जाने के बाद स्टेंट डाला था। हालांकि, डॉक्टरों के गहन प्रयासों के बावजूद हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण उनका निधन हो गया।

600 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक और अद्वितीय इतिहास

28 जून 1976 को उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा मूल रूप से टिहरी के रहने वाले थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा भी पूर्व सैनिक और आईटीबीपी के अधिकारी रहे। जसपाल राणा ने अपने शूटिंग करियर में देश के लिए कई कीर्तिमान स्थापित किए:

  • एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन: उन्होंने एशियाई खेलों में कुल 4 स्वर्ण पदक जीते। वर्ष 2006 का दोहा एशियाई खेल उनके करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय माना जाता है, जहां उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक अपने नाम किया था।
  • राष्ट्रमंडल खेल (CWG): कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में वे भारत के सबसे सफल एथलीटों में शुमार थे, जिनके नाम कुल 15 पदक (9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य) हैं।
  • प्रतिष्ठित सम्मान: खेल क्षेत्र में उनके बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।

एक बेमिसाल खिलाड़ी के रूप में देश का मान बढ़ाने के बाद, जसपाल राणा पिछले कई वर्षों से एक उत्कृष्ट कोच के तौर पर भारतीय शूटिंग की युवा पीढ़ी को निखार रहे थे। उनके असमय चले जाने से देश ने न केवल एक महान एथलीट, बल्कि एक बेहतरीन मार्गदर्शक भी खो दिया है।

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