मुख्य बिंदु:
रूड़की: उत्तराखंड की प्रसिद्ध पीरान कलियर दरगाह परिसर से अगवा किए गए सात महीने के मासूम बच्चे ‘अली रजा’ को पुलिस ने अपनी सूझबूझ और कड़ी मशक्कत से सकुशल बरामद कर लिया है। चार दिनों की सघन खोजबीन के बाद पुलिस ने लक्सर रेलवे स्टेशन के पास से बच्चे को सुरक्षित बचाकर उसके रोते-बिलखते परिजनों को सौंप दिया। इस मामले में पुलिस ने एक दिव्यांग महिला और उसके पुरुष साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पूछताछ में जो खुलासा किया है, उसने पुलिस और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है।
एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में से मुख्य आरोपी महिला पोलियो ग्रस्त है और भीख मांगकर गुजर-बसर करती है। महिला ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने दरगाह परिसर में देखा था कि जो महिलाएं अपनी गोद में छोटे बच्चों को लेकर भीख मांगती हैं, उन्हें लोग सहानुभूतिवश अधिक पैसे देते हैं। इसी लालच में आकर उसने अपने साथी समीर उर्फ सोनू के साथ मिलकर किसी छोटे बच्चे का अपहरण करने की योजना बनाई, ताकि बच्चे को सहारा बनाकर भीख से अधिक कमाई की जा सके।
मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले की रहने वाली कलसूम खातून ने 7 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका सात महीने का नाती अली रजा दरगाह परिसर से अचानक गायब हो गया है। बच्चे की मां (रजिया खातून) की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह अक्सर दरगाह आती-जाती रहती थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल विशेष टीमें गठित कीं। पुलिस ने दरगाह परिसर, रूड़की बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और आसपास के क्षेत्रों में लगे करीब 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इस दौरान पुलिस को दो मुख्य सुराग मिले:
इन्हीं अहम सुरागों, मोबाइल सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस आखिरकार लक्सर रेलवे स्टेशन तक पहुंची, जहां आरोपी महिला बच्चे को गोद में लेकर भीख मांग रही थी। पुलिस ने मौके से ही आरोपी महिला और उसके साथी समीर उर्फ सोनू उर्फ बड़ा (निवासी गोल्डन कॉलोनी, लंढौरा, मंगलौर) को धर दबोचा।
पूछताछ में आरोपी समीर ने बताया कि वारदात को अंजाम देने से पहले उन्होंने करीब एक सप्ताह तक बच्चे और उसकी मां की हर गतिविधि पर नजर रखी (रेकी की) थी। मौका मिलते ही उन्होंने बच्चे को चुराया और सीधे लंढौरा भाग गए।
आरोपी समीर कितना शातिर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपनी धार्मिक पहचान बदलकर लोगों को धोखा देता था। मुस्लिम होने के बावजूद उसने अपने हाथ पर ‘ओम’ का टैटू बनवा रखा था, ताकि जरूरत और जगह के हिसाब से वह खुद को हिंदू के रूप में पेश कर लोगों की सहानुभूति बटोर सके। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी पिछले दो साल से एक साथ रह रहे हैं।
पिछले चार दिनों से अपने जिगर के टुकड़े की तलाश में दर-दर भटक रहे परिजनों को जब पुलिस ने उनका बच्चा सौंपा, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने मुस्तैदी से काम करने वाली पुलिस टीम का सहृदय आभार व्यक्त किया है।
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