देहरादून, 12 जून: भारतीय निशानेबाजी के सबसे बड़े नामों में शुमार और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच जसपाल राणा का शुक्रवार तड़के दिल्ली के एक अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया। वह 49 वर्ष के थे। उनके असमय निधन से उत्तराखंड सहित पूरे देश के खेल प्रेमियों और खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। शुक्रवार देर शाम जसपाल राणा का पार्थिव शरीर देहरादून के पोंधा स्थित उनके मझौन गांव के आवास पर पहुंचा, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
अस्पताल के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) विश्व कप में भारतीय दल के साथ थे। वहां से लौटते समय उड़ान के दौरान उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ, जिसे उन्होंने सामान्य एसिडिटी समझ लिया था। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने आपातकालीन स्थिति में उनके दिल का ब्लॉकेज हटाने के लिए स्टेंट डाला था। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार आ गया था और शुक्रवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जानी थी, लेकिन नींद के दौरान अचानक ‘कार्डियक रप्चर’ (हृदय की मांसपेशी फटने) के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया।
जसपाल राणा के मार्गदर्शन में पेरिस ओलंपिक 2024 में दो ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाली स्टार निशानेबाज मनु भाकर अपने कोच को श्रद्धांजलि देने देहरादून पहुंचीं। अपने गुरु और मार्गदर्शक के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करते हुए मनु भाकर अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने जसपाल राणा को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान को भारतीय निशानेबाजी में कभी नहीं भुलाया जा सकेगा और उनके जाने से खेल का एक बड़ा युग समाप्त हो गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के कई बड़े नेताओं ने जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है[8]। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा:
“श्री जसपाल राणा जी के निधन से हम अत्यंत दुखी हैं। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। उन्होंने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश को अपार गौरव दिलाया। एक मार्गदर्शक के रूप में भी उनका योगदान उतना ही उल्लेखनीय रहा है, जिन्होंने युवा खिलाड़ियों को पूरे समर्पण के साथ तराशा।”
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और इसे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल पिस्टल निशानेबाजों में से एक थे। उन्होंने अपने शानदार करियर में एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 23 पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। वे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के सबसे सफल एथलीटों में से एक थे, जहां उन्होंने 15 पदक (9 स्वर्ण सहित) अपने नाम किए।
उनके बेमिसाल योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें:
संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोच के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखीं और मनु भाकर, सौरभ चौधरी और अनीश भानवाला जैसे कई होनहार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार किया।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जसपाल राणा के पार्थिव शरीर को शनिवार (13 जून) को वाराणसी ले जाया जाएगा। वहां मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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