Dharam Jyotish

कलियुग में हनुमान: पाँच पवित्र धामों की गाथा

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, पवनपुत्र हनुमान जी को भगवान श्रीराम से अजर-अमर होने का वरदान प्राप्त है, और वे कलियुग में भी अपने भक्तों की रक्षा के लिए पृथ्वी पर उपस्थित हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से स्मरण करने पर बजरंगबली अपने भक्तों को दर्शन भी देते हैं।

शास्त्रों और वेदों में भगवान हनुमान को कलयुग का देवता बताया गया है. कहा जाता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से हनुमान जी की पूजा करेगा, उसे भगवान जरूर दर्शन देंगे. इसलिए इन्हें कलयुग का जीवित या जागृत देवता कहा गया है.कहा जाता है कि आज कलयुग में भी इन 5 जगहों पर भगवान हनुमान मौजूद हैं.

1. गंधमादन पर्वत: चिरंजीवी का निवास

पुराणों के अनुसार, जब भगवान श्रीराम पृथ्वी लोक से बैकुंठ धाम जाने लगे, तो हनुमान जी ने भी उनके साथ जाने की इच्छा प्रकट की। तब श्रीराम ने उन्हें कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर रहकर भक्तों का कल्याण करने का आदेश दिया। इसके बाद हनुमान जी ने हिमालय के कैलाश पर्वत के उत्तर में स्थित गंधमादन पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया। यह वही स्थान है जहाँ उन्होंने रामायण काल में वानर सेना के साथ युद्ध की रणनीतियाँ बनाई थीं।महाभारत काल में भी इसी पर्वत पर भीम की भेंट अपने बड़े भाई हनुमान से हुई थी, जब वे सहस्त्रदल कमल लेने गए थे। हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धरकर भीम का अहंकार तोड़ा था। मान्यता है कि आज भी कई साधु-संतों ने इसी पवित्र स्थान पर तपस्या करके हनुमान जी के साक्षात दर्शन किए हैं।

2. किष्किंधा का अंजनी पर्वत: जहाँ हुई थी राम-हनुमान की भेंट

कर्नाटक में स्थित किष्किंधा का अंजनी पर्वत हनुमान जी का जन्म स्थान माना जाता है। इसी पर्वत पर माता अंजनी ने तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र के रूप में हनुमान जी की प्राप्ति हुई।रामायण में इस स्थान का विशेष उल्लेख है, क्योंकि यहीं पर भगवान राम और लक्ष्मण की भेंट हनुमान जी से हुई थी। यह स्थान आज भी जीवंत माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी आज भी इस पर्वत पर निवास करते हैं, जहाँ वे अपने बाल्यकाल की लीलाओं और भगवान राम के साथ बिताए क्षणों का स्मरण करते हैं।

3. हनुमानगढ़ी, अयोध्या: रामकोट के रक्षक

अयोध्या में सरयू नदी के तट पर स्थित हनुमानगढ़ी एक सिद्धपीठ है।माना जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम ने हनुमान जी को यह स्थान रहने के लिए दिया था, ताकि वे यहीं से रामकोट और राम जन्मभूमि की रक्षा कर सकें। इस मंदिर की यह भी मान्यता है कि हनुमान जी आज भी यहाँ सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।यह अयोध्या के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है, और यहाँ दर्शन किए बिना अयोध्या की यात्रा अधूरी मानी जाती है।

4. लेटे हुए हनुमान, प्रयागराज: गंगा के स्पर्श का रहस्य

प्रयागराज में संगम तट के निकट स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी प्रतिमा के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ हनुमान जी 20 फीट लंबी लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं।यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ हनुमान जी इस मुद्रा में हैं।पौराणिक कथा के अनुसार, लंका विजय के बाद जब हनुमान जी थककर यहाँ विश्राम कर रहे थे, तो माँ गंगा ने स्वयं प्रकट होकर उनका अभिषेक किया था। आज भी हर वर्ष वर्षा ऋतु में गंगा का जल मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचकर हनुमान जी की प्रतिमा का स्पर्श करता है और फिर लौट जाता है।यह चमत्कार देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं।

5. रामेश्वरम: जहाँ हनुमान ने स्थापित किया शिवलिंग

तमिलनाडु में स्थित रामेश्वरम धाम चार धामों में से एक है।यहाँ भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद रावण वध के ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी।कथा के अनुसार, श्रीराम ने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने भेजा, लेकिन मुहूर्त का समय निकलता जा रहा था। तब माता सीता ने बालू से एक शिवलिंग का निर्माण किया, जिसे राम ने स्थापित कर दिया। जब हनुमान शिवलिंग लेकर पहुँचे तो उन्हें बहुत दुख हुआ। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीराम ने उनके द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी पास में ही स्थापित किया और वरदान दिया कि रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की पूजा से पहले इस ‘हनुमदीश्वर’ शिवलिंग की पूजा अनिवार्य होगी।मान्यता है कि हनुमान जी आज भी इस स्थान पर अदृश्य रूप में उपस्थित रहते हैं और अपने प्रभु की भक्ति में लीन रहते हैं।

इन पाँच स्थानों के अलावा, यह भी कहा जाता है कि जहाँ-जहाँ पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ रामायण का पाठ होता है, वहाँ हनुमान जी किसी न किसी रूप में अवश्य उपस्थित रहते हैं।वे कलियुग के जागृत देवता हैं, जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनके सभी संकट हर लेते हैं।

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