नई दिल्ली: साल 2026 में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) की तारीख को लेकर भक्तों के मन में अभी से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सबसे बड़ी दुविधा यह है कि पर्व 14 जनवरी को मनाया जाए या 15 जनवरी को। इसका मुख्य कारण मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) का एक ही दिन पड़ना है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित होता है, जबकि मकर संक्रांति को ‘खिचड़ी’ के रूप में मनाते हुए चावल खाने और दान करने की परंपरा है।
आइए जानते हैं पंचांग और विद्वानों की राय के अनुसार इस बार क्या है सही निर्णय।
ग्रहों का दुर्लभ संयोग और पंचांग का गणित
पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही संक्रांति कहलाता है, इसलिए ज्योतिषीय रूप से संक्रांति 14 जनवरी को ही लग रही है।
वहीं, माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी दोपहर 03:17 बजे होगी और इसका समापन 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा। यानी 14 जनवरी को सूर्योदय के साथ एकादशी तिथि मान्य होगी, जिस कारण षटतिला एकादशी का व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा।
चावल को लेकर फंसा पेंच: एकादशी vs खिचड़ी
मकर संक्रांति को उत्तर भारत में ‘खिचड़ी पर्व’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन उड़द दाल, चावल, तिल और गुड़ की खिचड़ी खाने और दान करने का विधान है। समस्या यह है कि 14 जनवरी को एकादशी है और धर्म शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित (निषेध) माना गया है।
विद्वानों की सलाह: कब मनाएं पर्व?
इस स्थिति को देखते हुए विद्वानों ने शास्त्रों के आधार पर दो समाधान सुझाए हैं:
क्या एकादशी के दिन चावल दान कर सकते हैं?
लोगों में यह भ्रम भी है कि क्या एकादशी के दिन चावल का दान किया जा सकता है? विष्णु पुराण के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से दोष लगता है, लेकिन दान में चावल देने से कोई दोष नहीं लगता। हालांकि, व्रत रखने वाले साधकों के लिए चावल का स्पर्श या भोजन दोनों ही सावधानी का विषय है, इसलिए द्वादशी (15 जनवरी) को दान और सेवन करना श्रेष्ठ माना गया है।
बन रहे हैं अत्यंत शुभ योग
साल 2026 की मकर संक्रांति पर सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार, संक्रांति और एकादशी का यह दुर्लभ मिलन ‘अक्षय पुण्य’ फल देने वाला है। इस दिन किया गया स्नान, जप, तप और दान कई गुना फलदायी होगा।
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