कर्णप्रयाग (चमोली) | उत्तराखंड के कर्णप्रयाग स्थित बहुगुणा नगर में पिछले 4 सालों से भू-धंसाव (Land Subsidence) की मार झेल रहे आपदा पीड़ितों के सब्र का बांध आखिर टूट गया। बुधवार को सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपए की लागत से कराए जा रहे सुरक्षा कार्यों का लोगों ने उग्र विरोध किया। जैसे ही कार्यदायी संस्था की मशीनें मौके पर पहुंचीं, लोगों ने काम रुकवा दिया और धामी सरकार का पुतला फूंका।
प्रभावितों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें उनके उजड़े हुए घरों का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक वे इलाके में कोई भी निर्माण या सुरक्षा कार्य नहीं होने देंगे।
आपदा प्रभावितों का कहना है कि उनके घर टूटने की कगार पर हैं और सरकार उन्हें उचित मुआवजा देने के बजाय सुरक्षा दीवारों और सुधारीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। जब रहने के लिए घर ही सुरक्षित नहीं बचेंगे, तो इस सुरक्षा कार्य का क्या फायदा? प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा- “पहले मुआवजा दें, फिर सुरक्षा कार्य करें।”
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में कर्णप्रयाग नगर पालिका के बहुगुणा नगर में भारी भू-धंसाव हुआ था। इससे 38 भवनों में दरारें आ गई थीं और वे खतरे की जद में आ गए थे।
मुआवजे के सवाल पर तहसीलदार सुधा डोभाल ने बताया कि:
हालांकि, पीड़ित परिवार इस मामूली रकम से अपने घरों का पुनर्निर्माण करने में असमर्थ हैं और इसे नाकाफी बता रहे हैं।
बहुगुणा नगर ही नहीं, कर्णप्रयाग के सुभाषनगर और अपर बाजार के लोग भी सालों से आपदा की दहशत में जी रहे हैं। सुभाषनगर के पीड़ितों का दर्द है कि उनके इलाके को तो अब तक ‘आपदा प्रभावित क्षेत्र’ की सूची में ही शामिल नहीं किया गया है।
आपदा पीड़ित सुधीर नेगी ने कहा, “हम स्थानीय विधायक के साथ मुख्यमंत्री से भी मिलने गए थे, लेकिन आज तक हमारे लिए कोई योजना या मदद जमीन पर नहीं उतरी। ऐसे में हम अपने परिवार को लेकर जाएं तो जाएं कहां?”
वहीं, कार्य रुकने को लेकर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता शुभम डोभाल ने बताया, “बहुगुणा नगर में भू-धंसाव रोकने के लिए करीब 50 करोड़ की लागत से सुरक्षा कार्य कराए जाने हैं। बुधवार को जैसे ही मशीनें वहां पहुंचीं, स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। फिलहाल प्रशासन की टीम आपदा प्रभावितों से वार्ता कर समस्या का हल निकालने की कोशिश कर रही है।”
TV10 INDIA इनसाइट:
चमोली जिले में जोशीमठ से लेकर कर्णप्रयाग तक भू-धंसाव एक गंभीर समस्या बन चुका है। सरकार का फोकस बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को बचाने पर है, लेकिन जो लोग अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई से बनाए गए घरों को आंखों के सामने टूटता देख रहे हैं, उनकी सबसे पहली जरूरत ‘पुनर्वास और उचित मुआवजा’ है। जब तक प्रशासन लोगों का विश्वास नहीं जीतेगा, ऐसे टकराव सामने आते रहेंगे।
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