देहरादून | देहरादून के मसूरी रोड पर 30 मार्च को हुए गोलीकांड में जान गंवाने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के परिजन पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली से बेहद आहत हैं। घटना को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो पाई है और न ही सरकार ने पीड़ित परिवार की कोई मदद की है।
अब दिवंगत ब्रिगेडियर की पत्नी रेनू जोशी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है और राज्य सरकार से 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की है।
ब्रिगेडियर की पत्नी रेनू जोशी ने DLSA के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि उनके 74 वर्षीय पति का उस दिन हुए विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने 36 साल तक भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा की थी। अदम्य साहस के लिए उन्हें ‘सेना मेडल’ और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।
रेनू जोशी ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 300A का हवाला देते हुए कहा, “नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। कानून-व्यवस्था फेल होने के कारण एक सम्मानित पूर्व सैनिक की दिनदहाड़े सार्वजनिक सड़क पर हत्या कर दी गई। ऐसे में परिवार को हुए नुकसान की भरपाई करना सरकार का नैतिक और कानूनी दायित्व है।”
परिजनों का गुस्सा पुलिस की धीमी जांच पर भी है। रेनू जोशी ने बताया, “जब घटना हुई थी, तब अधिकारियों से लेकर नेताओं और खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक ने आश्वासन दिया था कि वे हमारे साथ हैं और पूरी मदद की जाएगी। लेकिन अब हम सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और कोई हमारी सुनने वाला नहीं है।”
उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस उनके पति के हत्यारों के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र (Chargesheet) तक दाखिल नहीं कर पाई है।
30 मार्च की सुबह रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी रोज की तरह मसूरी रोड स्थित जोहड़ी गांव की तरफ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान वहां दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर खूनी झड़प और फायरिंग शुरू हो गई। इसी अंधाधुंध फायरिंग के दौरान एक गोली सीधे ब्रिगेडियर जोशी को जा लगी, जिससे मौके पर ही उनका निधन हो गया था।
TV10 INDIA इनसाइट:
देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले एक मेडल विजेता पूर्व सैन्य अधिकारी की इस तरह दिनदहाड़े मौत देवभूमि की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। घटना के बाद बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन का एक महीने बाद पीड़ित परिवार से मुंह फेर लेना और पुलिस का चार्जशीट पेश न कर पाना, सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
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