- भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड में गूंजे भारत माता के जयकारे; ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने ली परेड की सलामी।
- छह महीने का कठिन प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में शामिल हुआ जांबाजों का छठा बैच; गौरवशाली क्षण देख परिजनों की आंखें हुईं नम।

पौड़ी गढ़वाल / लैंसडाउन: उत्तराखंड के ऐतिहासिक सैन्य क्षेत्र लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (GRRC) के प्रसिद्ध भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड में देश प्रेम का एक अद्भुत और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। यहाँ पूरे सैन्य सम्मान, परंपरा और रीति-रिवाजों के साथ अग्निवीरों की भव्य पासिंग आउट परेड संपन्न हुई। देश सेवा की कसम खाने के साथ ही ये युवा जांबाज अब औपचारिक रूप से भारतीय सेना का अभिन्न अंग बन गए हैं। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी पल के साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से आए अग्निवीरों के परिजनों के साथ भारी संख्या में स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने ली सलामी, दिलाई कर्तव्य की शपथ
इस भव्य पासिंग आउट परेड की सलामी गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडाउन के कमांडेंट, ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने ली। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और नव-प्रशिक्षित सैनिकों को भारत माता की आन, बान और शान की रक्षा करने की पवित्र शपथ दिलाई।
परेड के दौरान सबसे गौरवशाली और भावुक क्षण वह रहा जब नव-नियुक्त सैनिकों ने अपने कंधों पर गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट की पारंपरिक ‘रॉयल रस्सी’ (रॉयल लैनयार्ड) धारण की। इस दृश्य को देखकर पूरा परेड ग्राउंड देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। शपथ ग्रहण के बाद इन युवा सैनिकों ने मुख्य युद्ध स्मारक (War Memorial) पर जाकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि और सलामी अर्पित की।
कठिन ट्रेनिंग के बाद तैयार हुआ अग्निवीरों का छठा बैच
समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए सेंटर के कमांडेंट, ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने बताया कि यह अग्निवीरों का छठा बैच था, जिसने पिछले 6 महीनों के दौरान अत्यंत कठिन और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि इस बैच के कुल 374 अग्निवीरों में से आज 259 अग्निवीरों ने मुख्य कसम परेड में हिस्सा लिया, जबकि शेष अन्य अग्निवीर अपनी विशेष एवं अतिरिक्त ट्रेनिंग पूरी करने के लिए अन्य केंद्रों पर गए हैं।
ब्रिगेडियर नेगी ने गढ़वाल राइफल्स के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि इस रेजिमेंट का देश की सुरक्षा में अतुलनीय योगदान रहा है। गढ़वाल के वीर योद्धाओं ने हर मोर्चे पर अदम्य साहस का परिचय दिया है और आज भी उत्तराखंड के हर गांव और घर-घर से वीर सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।
“हमारी चौथी पीढ़ी आज सेना में हुई शामिल”—परिजनों का सीना गर्व से चौड़ा
परेड की समाप्ति के बाद मैदान पर अत्यंत भावुक कर देने वाले दृश्य दिखाई दिए। माता-पिता और परिजनों ने अपने बेटों को गले लगाया, उनका माथा चूमा और उन्हें पूरी निष्ठा से देश सेवा के पथ पर आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर काशीपुर से आए एक परिवार ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया, “आज हमारी चौथी पीढ़ी गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट का हिस्सा बनकर देश सेवा के लिए तैयार खड़ी है। एक परिवार के रूप में हमारे लिए इससे बड़े गर्व की बात और कुछ नहीं हो सकती।” इन युवाओं का जोश और परिजनों का समर्पण इस बात की गवाही दे रहा था कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए देवभूमि के युवाओं का जज्बा आज भी उतना ही बुलंद है।
