दिल्ली: 1912, जब बिहार के सीवान जिले में एक ऐसे व्यक्ति का जन्म होता है जो आजतक का हिंदुस्तान का सबसे बड़ा ठग था। जिसने ताज महल से लेकर संसद भवन तक बेचा है, ये कहानी है एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जिसपर 8 राज्यों द्वारा 100 से जयादा गुनाहो के साथ 113 सालो की उम्र कैद तक सुनाई गई थी। जिससे मिलने खुद देश के पहले राष्ट्रपति उसके गाँव जाते है, जहाँ उनके सामने वो राष्ट्रपति के हूबहू हस्ताक्षर करके दिखाता है और यहाँ तक कहता है की अगर आप इजाजत दे तो देश का विदेशियों से लिया पूरा कर्जा चुका दू , और उन्हें वापस से भारत का कर्ज़दार बना दू ,ये वो है जिसने ताज महल को 3 बार, लाल किले को 2 बार और राष्ट्रपति के ही हस्ताक्षर करके राष्ट्रपति भवन को तक बेच दिया था, जिसने कई बार अपना हुलिया बदलकर एक सोशल वर्कर या एक जरूरतमंद व्यक्ति बनकर धीरुभाई अम्बानी, बिड़ला और यहाँ तक की टाटा को भी ठगा है , ये वो है जिसने अपनी मौत के बाद भी सरकार को चख्मा दिया जिसकी 2 बार मृत्यु हुई जिसपर बॉलीवुड ने तक फिल्म बनाई, वह कोई और नहीं बल्कि नटवरलाल हैं।
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