अल्मोड़ा, जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए अल्मोड़ा के जांबाज सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर रविवार को पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनके गृह जनपद अल्मोड़ा पहुंचा। अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। नम आंखों और गगनभेदी नारों के बीच विश्वनाथ घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार (6 जून) को राजौरी के मंजाकोट इलाके के दुर्गम पहाड़ी जंगलों में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष सर्च अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान यह हादसा हुआ। भारतीय सेना की 5 असम रेजिमेंट में तैनात लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी एक संकरी पहाड़ी धार पर तलाशी दल का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने के कारण वे गहरी खाई में जा गिरे। साथी जवानों ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाकर उन्हें निकाला, लेकिन गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का सैन्य करियर बेहद उज्ज्वल था। जनवरी 2023 में सेना में शामिल होने के बाद जून 2024 में उन्हें कमीशन मिला था। अत्यंत गर्व और दुख की बात यह है कि ठीक दो दिन बाद ही उनकी कैप्टन के पद पर पदोन्नति (प्रमोशन) होने वाली थी। पूरा परिवार और उनके साथी इस ऐतिहासिक पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही वे देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे गए।
मूल रूप से रानीखेत तहसील के बगवालीपोखर (बाड़ी) निवासी और वर्तमान में पांडेखोला (अल्मोड़ा) में रहने वाले बीरेश्वर बचपन से ही अत्यंत मेधावी थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल रानीखेत और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से हुई। इसके बाद ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में स्नातक के दौरान वे सिल्वर मेडलिस्ट रहे। एनडीए (NDA) पास करने के साथ ही उनका चयन कैट (CAT), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) और इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी के लिए भी हुआ था, लेकिन उन्होंने कॉर्पोरेट करियर या विदेश जाने के बजाय देश सेवा को सर्वोपरि माना।
उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में प्रशासनिक अधिकारी हैं और माता सरस्वती गोस्वामी शिक्षिका हैं, जबकि उनका बड़ा भाई अमित गोस्वामी भी सरकारी सेवा में कार्यरत है।
शहीद का पार्थिव शरीर रविवार को सेना के विमान से जम्मू से पंतनगर एयरपोर्ट लाया गया। वहां से सेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से इसे अल्मोड़ा आर्मी हेलीपैड पहुंचाया गया, जहां सेना के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक अंतिम सलामी दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पांडेखोला स्थित आवास पर ले जाया गया। रास्ते भर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और अनेक स्थानों पर लोगों ने सड़क के दोनों ओर खड़े होकर पुष्प वर्षा की। पूरा नगर “भारत माता की जय” और “शहीद बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहे” के नारों से गूंज उठा।
आवास पर अंतिम दर्शन के बाद शहीद बीरेश्वर गोस्वामी की अंतिम यात्रा निकाली गई। उनकी पार्थिव देह को विश्वनाथ घाट ले जाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान और रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के बड़े भाई अमित गोस्वामी और उनके चाचा ने उन्हें मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने शस्त्र झुकाकर एवं गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर शहीद अधिकारी को अंतिम सलामी दी।
अल्मोड़ा के जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में राष्ट्र की रक्षा के लिए दिया गया उनका यह सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा और युवा पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनेगा[।”
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) चंद्रशेखर आर घोड़के, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, रवि रौतेला, बिट्टू कर्नाटक, केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद अजय टम्टा सहित सैकड़ों की संख्या में जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
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