Dharam Jyotish

झूठ बोलने की मिली सजा: आज भी माता सीता का श्राप भुगत रहे हैं ये सभी

नई दिल्ली: हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ रामायण में वर्णित एक कथा के अनुसार, माता सीता ने अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान किया था, लेकिन इस दौरान झूठ बोलने के कारण उन्होंने कुछ ऐसी entidades को श्राप दे दिया, जिसका प्रभाव आज भी कलयुग में देखने को मिलता है। यह प्रसंग उस समय का है जब वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु का समाचार सुनकर उनका पिंडदान करने के लिए बिहार के गया धाम पहुंचे थे।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, पिंडदान के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने के लिए भगवान राम और लक्ष्मण नगर की ओर चले गए। इसी बीच, पिंडदान का समय निकला जा रहा था। तभी राजा दशरथ की आत्मा ने माता सीता के समक्ष प्रकट होकर उनसे पिंडदान करने का आग्रह किया, ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

पिता समान ससुर की आज्ञा का पालन करते हुए माता सीता ने फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने का निर्णय लिया। उन्होंने वहां मौजूद फल्गु नदी, एक गाय, एक कौवे, एक ब्राह्मण और एक वटवृक्ष को इस कर्म का साक्षी बनाया। राजा दशरथ ने सीता के हाथों से पिंड दान स्वीकार किया और तृप्त होकर पितृ लोक चले गए।

जब भगवान राम और लक्ष्मण वापस लौटे, तो सीता ने उन्हें पूरी घटना बताई। इस पर श्रीराम को विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने साक्ष्य मांगा। माता सीता ने उन पांचों साक्षियों को गवाही देने के लिए बुलाया। परंतु, वटवृक्ष को छोड़कर बाकी चारों (फल्गु नदी, गाय, कौआ और ब्राह्मण) अपने वचन से मुकर गए और झूठ बोल दिया कि उन्होंने कुछ नहीं देखा।

इस विश्वासघात से माता सीता अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने उन चारों को श्राप दे दिया।

  • फल्गु नदी: माता सीता ने फल्गु नदी को श्राप दिया कि वह हमेशा सूखी रहेगी और उसकी सतह पर कभी पानी नहीं बहेगा। आज भी गया में फल्गु नदी सतह के नीचे बहती है, ऊपर से वह रेत ही दिखाई देती है।
  • गाय: पूजनीय होने के बावजूद गाय को जूठन खाने का श्राप मिला। इसी कारण आज भी गाय को पूजा जाने के बाद भी दर-दर भटककर जूठा भोजन खाना पड़ता है।
  • ब्राह्मण: सीता जी ने ब्राह्मण को श्राप दिया कि उसे कितना भी दान-दक्षिणा क्यों न मिले, उसकी दरिद्रता कभी समाप्त नहीं होगी।
  • कौआ: कौवे को यह श्राप मिला कि अकेले खाने से उसका पेट कभी नहीं भरेगा और उसकी मृत्यु आकस्मिक होगी।

वहीं, सत्य का साथ देने वाले वटवृक्ष को माता सीता ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने वटवृक्ष को लंबी आयु का वरदान दिया और यह भी कहा कि सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए उनकी पूजा करेंगी। आज भी यह सभी श्राप और वरदान चरितार्थ होते देखे जा सकते हैं।

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