
देहरादून | संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक 2026’ (131वां संविधान संशोधन) पारित नहीं हो पाने के बाद उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण बिल गिरने को भाजपा ने ‘मातृशक्ति का अपमान’ बताया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर द्वेषपूर्ण राजनीति का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने विपक्षी दल के खिलाफ प्रदेश व्यापी जन आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- बिल फेल: लोकसभा में पारित होने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में एनडीए सरकार विफल रही।
- परिसीमन का पेंच: बिल में लोकसभा की सीटें 545 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
- भाजपा का प्लान: विपक्षी दलों को ‘महिला विरोधी’ बताने के लिए भाजपा पूरे देश और उत्तराखंड के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी।
- कांग्रेस का तर्क: आरक्षण 2023 में ही पास हो चुका है, भाजपा परिसीमन के बहाने जनता को गुमराह कर रही है।
क्या था इस संशोधन बिल में? (नया राजनीतिक नक्शा)
इस विधेयक के जरिए देश की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव रखा गया था:
- लोकसभा सीटें: 545 से बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य।
- राज्यों की सीटें: 530 से बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव।
- बहुमत का आंकड़ा: केंद्र में सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 272 से बढ़कर 426 हो जाता।
- लक्ष्य: महिला आरक्षण (33%) को 2029 के चुनाव से पहले लागू करना।
वार-पलटवार: किसने क्या कहा?
1. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी:
“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को हक देने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। कांग्रेस का दोहरा चरित्र सामने आ गया है—बातों में सशक्तिकरण और जमीन पर विरोध। यह महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है।”
2. विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी:
“यह देश की सभी बहनों के लिए ‘काला दिवस’ है। संसद में इतिहास रचने का मौका था, लेकिन विपक्ष की वजह से हम चूक गए। प्रधानमंत्री ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन यह दुखद है कि बिल पारित नहीं हो सका।”
3. गणेश गोदियाल (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस):
“सच्चाई यह है कि महिला आरक्षण कानून 2023 में ही बन चुका है। भाजपा इस नए बिल के जरिए सीटें बढ़ाना चाहती थी जिसका आधार स्पष्ट नहीं था। वर्तमान सीटों पर ही 33% आरक्षण क्यों नहीं लागू किया जा रहा? भाजपा सिर्फ गुमराह कर रही है।”
चुनौती बना ‘परिसीमन 2026’
विपक्ष का मुख्य विरोध महिला आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसके साथ जुड़े परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन) पर है। कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने की आड़ में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती है, जबकि भाजपा का तर्क है कि 2011 की जनगणना और परिसीमन के बिना आरक्षण को सही तरीके से लागू करना तकनीकी रूप से कठिन है।
आगामी 2027 चुनाव पर नजर
भाजपा इस मुद्दे को उत्तराखंड के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में है। पार्टी की राज्य इकाई को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांव-गांव जाकर यह संदेश दें कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटकाए हैं।
