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राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026: दिल्ली में उत्तराखंड के 50 ग्राम प्रधान सम्मानित, गांवों के कायाकल्प पर हुई चर्चा

नई दिल्ली/देहरादून: देश की राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आज ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर उत्तराखंड के 50 ग्राम प्रधानों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशेष रूप से आमंत्रित और सम्मानित किया गया। समारोह में केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने प्रतिनिधियों को सम्मानित करते हुए ग्रामीण विकास का नया रोडमैप साझा किया।

टिहरी के 10 ग्राम प्रधानों ने बढ़ाया मान

समारोह में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जिनमें टिहरी जिले के 10 ग्राम प्रधान प्रमुख रूप से शामिल रहे। टिहरी के रौलाकोट, भेंनगी और पातुड़ी जैसे गांवों के प्रधानों को उनके द्वारा गांव के विकास में दिए गए अनुकरणीय योगदान के लिए केंद्रीय मंत्री ने मंच पर सम्मानित किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश और हरियाणा के निर्वाचित प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

पंचायतों के लिए बड़ी घोषणा: 16वें वित्त के बजट में 85% का इजाफा

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में विकास की रूपरेखा पर चर्चा की गई। सरकार ने पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 16वें वित्त आयोग की धनराशि में 85 फीसदी तक की वृद्धि की है। इस फैसले से गांवों में सड़क, पानी, शिक्षा और स्वच्छता जैसे बुनियादी ढांचों के विकास में तेजी आएगी।

‘मेरी पंचायत मेरी धरोहर’ और नई पुस्तकों का विमोचन

समारोह के दौरान पंचायतों के मूल्यांकन और उनकी विरासत को सहेजने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:

  • PAI 2.0: ‘पंचायत उन्नति सूचकांक’ (PAI) 2.0 की रिपोर्ट जारी की गई।
  • साहित्यिक योगदान: ‘मेरी पंचायत मेरी धरोहर’ श्रृंखला के तहत 3 पुस्तकों का विमोचन हुआ।
  • उत्तराखंड का गौरव: ग्रामीण विरासत पर आधारित विशेष पुस्तकों में ‘उत्तरकाशी: सौम्या काशी: हिमालयी विरासत की आत्मा’ को भी जारी किया गया, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर रखेगी।

24 अप्रैल का महत्व और महिला शक्ति की बढ़ती भागीदारी

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को 1993 के 73वें संविधान संशोधन के कार्यान्वयन की याद में मनाया जाता है, जिसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया था।

  • देशभर की स्थिति: वर्तमान में भारत में 2.5 लाख से अधिक पंचायतें हैं।
  • महिला सशक्तिकरण: लगभग 24.04 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 49.75 फीसदी महिलाएं हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में स्थानीय शासन अब अधिक समावेशी और सशक्त हो रहा है।

विकास की नई राह

केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने ग्राम प्रधानों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि गांव ही देश की उन्नति का आधार हैं। उन्होंने प्रधानों को तकनीक अपनाने और पारदर्शी शासन व्यवस्था लागू करने के लिए प्रेरित किया। उत्तराखंड के प्रधानों ने इस सम्मान को प्रदेश के लिए गौरव बताया और गांव को आदर्श बनाने का संकल्प लिया।


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