रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर): उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के लिए पिछला कुछ समय बेहद दर्दनाक रहा है। जिले में अलग-अलग स्थानों पर हुए भीषण सड़क हादसों और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं में कई परिवारों के चिराग बुझ गए हैं, जिससे प्रशासन और स्थानीय जनता के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है।
पहली हृदयविदारक घटना ग्राम मुकरंदपुर में सामने आई। 55 वर्षीय शंकर मंडल अपनी ठेली लेकर घर लौट रहे थे, तभी महतोष मोड़ पर एक अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया। स्थानीय लोग इस मोड़ को ‘डेथ जोन’ के नाम से पुकारते हैं, क्योंकि यहाँ अक्सर हादसे होते रहते हैं। शंकर मंडल की मौके पर ही मौत हो गई। वह अपने पीछे चार बच्चों और पत्नी को छोड़ गए हैं, जिनके सिर से अब घर के इकलौते कमाने वाले का साया उठ गया है।
हादसों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। लालपुर क्षेत्र में एक टुकटुक चालक संजय बैरागी की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। संजय किच्छा से अपनी बाइक पर घर लौट रहे थे, तभी एक डग्गामार बस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। संजय के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो अब अपने पिता का इंतजार कभी खत्म नहीं कर पाएंगे।
समाजसेवी सुशील गाबा ने इन हादसों पर गहरा दुख जताते हुए सरकार से मांग की है कि फरार वाहन चालकों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए ताकि मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
जिले में सड़क हादसों के अलावा कई संदिग्ध मौतें भी दर्ज की गई हैं:
इन सभी मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी क्राइम जितेंद्र चौधरी ने बताया कि पुलिस सक्रियता से जांच कर रही है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अज्ञात वाहनों की तलाश की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अन्य संदिग्ध मौतों के मामले में शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद परिजनों की तहरीर के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लगातार बढ़ते हादसे और संदिग्ध मौतें प्रशासन की कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा नीतियों पर सवालिया निशान लगा रही हैं। स्थानीय निवासियों ने ‘डेथ जोन’ जैसे संवेदनशील इलाकों में पुलिस पिकेट और गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) लगाने की मांग तेज कर दी है।
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