नीम करोली बाबा के कैंची धाम का स्थापना दिवस 15 जून है. उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित इस पावन धाम की स्थापना 15 जून 1964 को की गई थी, जब बाबा नीम करोली महाराज ने यहाँ हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की थी.तब से हर साल 15 जून को कैंची धाम का स्थापना दिवस एक बड़े उत्सव और भव्य मेले के रूप में मनाया जाता है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेने आते हैं

नैनीताल: विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कैंची धाम में आज, सोमवार 15 जून को बाबा नीम करोली महाराज के पावन दरबार का स्थापना दिवस पूरी श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर बाबा नीम करोली के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। तड़के सुबह 4 बजे से ही हजारों भक्त कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, अध्यात्म के रंग में रंगे भक्त
कैंची धाम आज भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। बाबा नीम करोली महाराज के प्रति अगाध श्रद्धा न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी गहराई से फैली है। यही कारण है कि अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में विदेशी भक्त धाम पहुंचे हैं।
बाबा नीम करोली महाराज और चमत्कारों की कहानियां
श्रद्धालु बाबा नीम करोली महाराज को पवनपुत्र हनुमान जी का स्वरूप मानते हैं। उनके जीवनकाल से जुड़े कई चमत्कार आज भी भक्तों की अटूट आस्था का मुख्य आधार हैं।
- पानी बना घी: मान्यता है कि एक बार धाम में भंडारे के दौरान अचानक देसी घी समाप्त हो गया था। तब बाबा के आदेश पर भक्तों ने समीप बहने वाली शिप्रा नदी से पानी लाकर कढ़ाई में डाला, जो बाबा की कृपा से तुरंत शुद्ध घी में परिवर्तित हो गया।
- झुलसा हाथ हुआ ठीक: एक अन्य प्रसंग के अनुसार, मंदिर निर्माण के दौरान खौलते तेल से एक व्यक्ति का हाथ बुरी तरह झुलस गया था। बाबा ने उसे पास बुलाकर अपना कंबल उस पर फेरा और उसका हाथ पूरी तरह सामान्य हो गया।
कैसे हुई कैंची धाम की स्थापना?
धाम की स्थापना से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा के अनुसार, स्थानीय निवासी धर्मानंद तिवारी को एक रात कंबल ओढ़े एक दिव्य संत मिले थे, जिन्होंने उन्हें यात्रा के दौरान वाहन मिलने का आश्वासन दिया था। उस संत ने ठीक 20 वर्ष बाद पुनः मिलने की बात कही थी। वर्षों बाद जब बाबा नीम करोली महाराज ने धर्मानंद तिवारी को दर्शन दिए, तो उन्होंने इसी स्थान पर मंदिर निर्माण का निर्देश दिया, जिसके बाद कैंची धाम अस्तित्व में आया।
वैश्विक हस्तियों की आस्था का केंद्र
बाबा के भक्तों में वैश्विक स्तर की कई बड़ी हस्तियां शामिल रही हैं। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स ने भारत प्रवास के दौरान कैंची धाम का दौरा किया था। वहीं, मेटा (फेसबुक) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने भी स्वीकार किया था कि अपने जीवन के कठिन दौर में स्टीव जॉब्स की सलाह पर वे कैंची धाम आए थे, जहाँ से उन्हें एक नई दिशा मिली।
सुरक्षा और सुगम यातायात के लिए चाक-चौबंद इंतजाम
लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला पुलिस और प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। नैनीताल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि:
“पूरे मेला क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से 4 सुपर जोन और 8 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एसटीएफ (STF), बीडीएस (BDS), पैरामिलिट्री फोर्स और ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है ताकि चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सके।”
विशेष ट्रैफिक और शटल प्लान:
यातायात को सुचारू रखने के लिए कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। निजी वाहनों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भीमताल, भवाली, सैनिटोरियम, नैनीताल, खैरना, अल्मोड़ा, हल्द्वानी और काठगोदाम से नॉन-स्टॉप शटल सेवाएं संचालित की जा रही हैं। निर्धारित पार्किंग स्थलों पर गाड़ियां खड़ी करने के बाद सभी श्रद्धालु शटल सेवा के जरिए ही मंदिर तक पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही सुगम संचालन के लिए वाहनों पर विशेष ‘येलो स्टीकर’ की व्यवस्था लागू की गई है। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और पुलिसकर्मियों का सहयोग करने की अपील की है।
