नई दिल्ली: पेरिस ओलंपिक में सभी को नीरज चोपड़ा से गोल्ड जीतने की उम्मीद है। उनके कोच बार्टोनिट्ज ने पीटीआई को दिए अपने बयान में कहा कि नीरज की तैयारी और फिटनेस हमारी प्लानिंग के अनुसार चल रही है। फिलहाल नीरज की जांघ की चोट पूरी तरह ठीक हो चुकी है और उन्हें अब कोई समस्या नहीं है।
कोच ने कहा, “हम सभी को उम्मीद है कि ओलंपिक में नीरज अपनी पूरी क्षमता के साथ खेलेंगे और 100 फीसदी देने की कोशिश करेंगे। ओलंपिक में अभी कुछ दिन का समय है, इसलिए हमने ट्रेनिंग का स्तर बढ़ा दिया है जिसमें नीरज थ्रोइंग का सत्र कर रहे हैं।”
पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं और नीरज चोपड़ा के कोच बार्टोनिट्ज ने उनकी फिटनेस को लेकर आश्वासन दिया है। करीब पांच साल से नीरज के साथ जुड़े बार्टोनिट्ज ने कहा कि अब चीजें पटरी पर आ गई हैं और सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा है। फिलहाल नीरज की जांघ की चोट पूरी तरह ठीक है और उम्मीद है कि ओलंपिक तक यह स्थिति बनी रहेगी।
ओलंपिक में भाला फेंक की स्पर्धा शुरू होने में अभी दो सप्ताह का समय बचा है, इसलिए ट्रेनिंग का स्तर बढ़ा दिया गया है। नीरज अब पूरा थ्रोइंग सत्र कर रहे हैं और उनकी ट्रेनिंग योजना टोक्यो ओलंपिक से पहले अपनाए गए तरीके जैसी ही है।
बार्टोनिट्ज ने बताया कि नीरज की ट्रेनिंग में सुबह और शाम दो सत्र होते हैं, जिनमें प्रत्येक सत्र दो से ढाई घंटे तक का होता है। सुबह के सत्र में स्प्रिंटिंग, जंपिंग, थ्रोइंग या वेटलिफ्टिंग शामिल होती है। नीरज अपने ग्रोइन पर दबाव कम करने के लिए अपनी ब्लॉकिंग करने वाले पैर को मजबूत बनाने पर भी काम कर रहे हैं।
उन्होंने समझाया, “सामान्यत: भाला फेंकना तेजी से भागते हुए अच्छी तरह रुककर भाला फेंकने (ब्लॉकिंग) पर निर्भर करता है। भागते हुए आप जितनी अधिक ऊर्जा से आएंगे, उतना ही बेहतर होगा।”
इस बयान से स्पष्ट है कि नीरज की तैयारी पूरी तरह से ट्रैक पर है और उनके कोच उन्हें ओलंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार कर रहे हैं।
आगामी पेरिस ओलंपिक में जेवलिन थ्रो इवेंट के क्वालिफिकेशन का दौर 6 अगस्त से शुरू होगा, जिसके लिए अभी लगभग 2 हफ्तों का समय है। नीरज चोपड़ा के कोच बार्टोनिट्ज ने उनकी ट्रेनिंग कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हम सुबह में ‘स्प्रिंटिंग’, ‘जंपिंग’, ‘थ्रोइंग’ या ‘वेटलिफ्टिंग’ के सत्र रखते हैं। सुबह और शाम दो सत्र होते हैं, जिनमें प्रत्येक दो से ढाई घंटे तक का होता है।
चोपड़ा का तरीका टोक्यो ओलंपिक से पहले अपनाए गए तरीके जैसा ही है, जिसमें वह टूर्नामेंट के बजाय ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वह अपने ‘ग्रोइन’ पर दबाव कम करने के लिए अपनी ‘ब्लॉकिंग’ करने वाले पैर को मजबूती देने पर भी काम कर रहे हैं। बार्टोनिट्ज ने बताया कि नीरज की ट्रेनिंग योजना पूरी तरह से ट्रैक पर है और उनकी जांघ की चोट अब पूरी तरह से ठीक हो चुकी है।
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