काठमांडू: नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रासुवागढ़ी क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से भीषण तबाही मची है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 270 शव बरामद किए जा चुके हैं। प्रशासन द्वारा मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी दी कि नेपाल और तिब्बत (चीन) दोनों क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 1,500 लोग लापता हैं, जिनमें कम से कम 800 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ के चलते कई प्रमुख संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गए हैं, जिसके कारण हजारों लोग दुर्गम इलाकों में फंसे हुए हैं।
बुधवार को आई इस भीषण आपदा के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर बचाव कार्य शुरू किया गया है। बचाव दल फंसे हुए लोगों की तलाश और उन तक आवश्यक खाद्य सामग्री व दवाइयां पहुंचाने के लिए लगातार हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह आपदा तिब्बत के ल्हासा को काठमांडू से जोड़ने वाले बीहड़ और पहाड़ी क्षेत्र में आई है, जो ट्रेकर्स, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय मार्ग है।
पुलिस प्रवक्ता एबी नारायण काफ्ले ने बताया, “तलाशी अभियान को और तेज कर दिया गया है। आशंका है कि मलबे और दुर्गम इलाकों से और शव मिल सकते हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।”
पुलिस और पर्यटन विभाग के अनुसार, अकेले नेपाल क्षेत्र से लापता 826 लोगों में से लगभग 600 विदेशी नागरिक हैं।
बाढ़ के बाद लापता हुए विदेशी नागरिक दो दर्जन से अधिक देशों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है:
चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘सीसीटीवी’ (CCTV) की रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी इस आपदा का गंभीर असर पड़ा है। वहाँ से 558 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। दोनों देशों की सीमा पर राहत एवं तलाशी अभियान लगातार जारी है।
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