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इस दिन मनाई जाएगी सीता नवमी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

New Delhi: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन पृथ्वी की कोख से माता सीता का प्राकाट्य हुआ था। संतान प्राप्ति की कामना लिए यज्ञ की भूमि जोत रहे राजा जनक को पुत्री के रूप में सीता जी मिली थीं। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2024 में सीता नवमी कब मनाई जाएगी, और इस दिन किस विधि से आपको मां जानकी की पूजा आराधना करनी चाहिए। 

साल 2024 में सीता नवमी का त्योहार 16 मई को मनाया जाएगा। नवमी तिथि की शुरुआत 16 मई गुरुवार के दिन सबुह 6 बजकर 22 मिनट से होगी और इसकी समाप्ति अगले दिन सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर होगी। सीता नवमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 3 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस दौरान माता सीता और राम जी की पूजा करने से आपको शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। 

सीता नवमी पूजा विधि

हिंदू धर्म के अन्य पवित्र त्योहारों की ही तरह सीता नवमी के दिन भी सुबह जल्दी उठकर आपको स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल में लाल कपड़ा आपको रखना चाहिए और उसपर राम दरबार सजाना चाहिए। इसके बाद धूप-दीप जलाकर पूजा आरंभ करनी चाहिए। पूजा की शुरुआत में आपको पीले फूल माता सीता और राम जी को अर्पित करने चाहिए, इसके उपरांत चंदन या कुमकुम का तिलक लगाना चाहिए। इसके बाद आप रामायण या रामचरितमानस का पाठ इस दिन कर सकते हैं। पूजा के अंत में माता सीता और राम जी की आरती आपको अवश्य करनी चाहिए। इसके बाद प्रसाद के रूप में फल, मिठाई, खीर इत्यादि खुद भी ग्रहण करना चाहिए और घर के अन्य सदस्यों को भी देना चाहिए। इस सामान्य विधि से श्रद्धापूर्वक अगर आप माता सीता की पूजा करते हैं तो आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

सीता नवमी पूजा के लाभ 

अगर सीता नवमी के दिन आप विधि-विधान से सीता जी की पूजा करते हैं तो आपके पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस बात का ख्याल रखें कि सीता जी के साथ ही इस दिन राम जी की पूजा भी अवश्य करें। इस दिन पूजा करने से आपको लक्ष्मी जी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है क्योंकि माता सीता को लक्ष्मी मां का अवतार माना जाता है। माता सीता की पूजा करने से आपके घर में कलेश नहीं होता और आर्थिक रूप से भी आप संपन्न होने लगते हैं। इस दिन माता, पत्नि, पुत्री आदि को उनकी पसंद का उपहार देने से माता सीता आप पर प्रसन्न होती हैं। जो स्त्रियां संतान संतान प्राप्ति की इच्छा रखती हैं उनकी मुराद भी माता सीता की पूजा करने से पूरी हो सकती है। 

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