भाई-बहन: वह कच्चा धागा, जिसमें सबसे पक्की गांठ है

'सिबलिंग्स डे' पर विशेष
सुनीत द्विवेदी
एडिटर
TV10 INDIA
आगामी 10 अप्रैल को 'सिबलिंग्स डे' है। बाज़ार इस ताक में बैठा होगा कि आपको कोई महंगा तोहफा बेच दे। सोशल मीडिया इस इंतज़ार में कि आप एक 'परफेक्ट' फोटो डालकर दुनिया को बता सकें कि आप कितने सुखी हैं। लेकिन, जरा ठहरिए और सच का पोस्टमार्टम कीजिए। भाई-बहन का रिश्ता उस पुरानी साइकिल की तरह है, जिसकी चेन बार-बार उतरती है। हाथ काले होते हैं। गुस्सा आता है। पर उसी पर बैठकर बचपन की सबसे खूबसूरत सवारी पूरी होती है।
दिखावा नहीं, यह 'हक' की लड़ाई है।
आजकल के 'न्यूक्लियर' दौर में जहां लोग प्राइवेसी की दीवारें ऊंची कर रहे हैं, वहां भाई-बहन का रिश्ता उस दीवार में लगी एक ऐसी दरार है, जिससे बचपन की ताज़ी हवा आती है। यह रिश्ता क्या है?
यह एक अघोषित युद्ध है, जो रिमोट के लिए शुरू होता है और 'मम्मी को बता दूंगा' की धमकी पर खत्म होता है। इसमें शिष्टाचार नहीं होता, इसमें 'हक' होता है। वह हक, जो दुनिया के किसी और रिश्ते में नहीं मिल सकता।
विज्ञान कहता है कि आप और आपके भाई-बहन के बीच 50% DNA साझा होता है। लेकिन यथार्थ देखिए, उसी हिस्सेदारी की वजह से आप एक-दूसरे की शक्ल बर्दाश्त नहीं कर पाते और उसी की वजह से एक की आंखों में आंसू आए, तो दूसरे का दिल बैठ जाता है। यह प्रकृति का सबसे बड़ा विरोधाभास है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया का एक अध्ययन कहता है कि जिनके पास भाई या बहन होती है, वे मानसिक रूप से अधिक मजबूत होते हैं। कारण साफ है। बचपन में जो 'कुश्ती' आपने सोफे पर की थी, उसने आपको बाहरी दुनिया के दंगों के लिए तैयार कर दिया। भाई-बहन आपको डिप्रेशन से नहीं बचाते, वे आपको डिप्रेशन में जाने का 'वक्त' ही नहीं देते क्योंकि उनकी खिंचाई का सिलसिला कभी रुकता ही नहीं।
वे आपके 'सीक्रेट लॉकर' भी हैं। माता-पिता के बाद, यही वे लोग हैं जो आपके अतीत के उन पन्नों को जानते हैं, जिन्हें आपने दुनिया के सामने फाड़कर फेंक दिया है। वे आपके 'क्राइम पार्टनर' भी हैं और आपके सबसे बड़े 'ब्लैकमेलर' भी।
पर मजा देखिए, वे ब्लैकहोल की तरह हैं। सब कुछ जानते हुए भी दुनिया के सामने आपके सबसे मजबूत गार्ड बनकर खड़े रहते हैं।
आज हम लाइक्स और कमेंट्स के भूखे हैं, लेकिन भाई-बहन वह पहली 'सोशल नेटवर्किंग' थे, जहां फीडबैक तुरंत और बेबाक मिलता था। अगर आप कोई खराब ड्रेस पहनें, तो दुनिया लिहाज़ में झूठ बोल देगी, पर भाई या बहन सीधा कहेगा "जोकर लग रहा है, बदल ले।" यह कड़वी ईमानदारी ही इस रिश्ते की रीढ़ है, जो आज के दौर में लुप्त हो रही है।
हालांकि आंकड़े बताते हैं कि जैसे-जैसे संपत्ति और जमीन के विवाद बढ़ते हैं, ये '50% DNA' वाले लोग एक-दूसरे के लिए अजनबी हो जाते हैं। याद रखिएगा, कागज के टुकड़े अलमारी भर सकते हैं, पर बचपन की उन यादों को वापस नहीं खरीद सकते जो आपने एक ही थाली में खाते हुए बनाई थीं।
आज के दिन बस इतना कीजिए कि दिखावा छोड़िए। अगर सालों से बातचीत बंद है, तो ईगो का चश्मा उतारिए।
पुराना किस्सा छेड़िए। कोई ऐसा राज, जो सिर्फ आप दोनों के बीच की अमानत हो। कौन कितना कमा रहा है? किसका घर बड़ा है? यह हिसाब बाहर रखिए।
अंत में बात वही है। रिश्ता वह नहीं, जो साल में एक बार फोटो खिंचवाने के काम आए, रिश्ता वह है, जो तब काम आए जब पूरी दुनिया आपके खिलाफ खड़ी हो। भाई-बहन का होना किसी वरदान से कम नहीं, बशर्ते आप उन्हें 'स्टेटस' की जगह 'दिल' में जगह दें। तय आपको करना है कि आप 'आंकड़ों' में जीना चाहते हैं या 'अहसासों' में।
