🔴 Latest
🔴 नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 270 शव बरामद; 288 भारतीयों समेत 1,500 लोग लापता🔴 पहाड़ में दौड़ेगी रेल: 2028 तक ब्यासी पहुंचेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में🔴 पहाड़ में दौड़ेगी रेल: 2028 तक ब्यासी पहुंचेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में🔴 नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 270 शव बरामद; 288 भारतीयों समेत 1,500 लोग लापता🔴 लंपी वायरस की आहट से सरकार अलर्ट: पशुओं के अंतर्राज्यीय परिवहन और प्रदर्शनियों पर एक महीने की रोक, टीकाकरण तेज🔴 नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 270 शव बरामद; 288 भारतीयों समेत 1,500 लोग लापता🔴 पहाड़ में दौड़ेगी रेल: 2028 तक ब्यासी पहुंचेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में🔴 पहाड़ में दौड़ेगी रेल: 2028 तक ब्यासी पहुंचेगी ट्रेन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट का काम अंतिम दौर में🔴 नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 270 शव बरामद; 288 भारतीयों समेत 1,500 लोग लापता🔴 लंपी वायरस की आहट से सरकार अलर्ट: पशुओं के अंतर्राज्यीय परिवहन और प्रदर्शनियों पर एक महीने की रोक, टीकाकरण तेज
Home /uk

देश में पहली बार बाघों की गणना में MSTrIPES ऐप का इस्तेमाल: घने जंगलों में बिना इंटरनेट के करेगा काम; फर्जी गश्त पर भी लगेगी रोक

30 July 2026

AI News Reader

खबर सुनें (Listen Now)

देश में पहली बार बाघों की गणना में MSTrIPES ऐप का इस्तेमाल: घने जंगलों में बिना इंटरनेट के करेगा काम; फर्जी गश्त पर भी लगेगी रोक

मुख्य बातें:

  • डिजिटल होगी गिनती: देश में बाघों की ऑल इंडिया गणना में पहली बार कागजी रिकॉर्ड की जगह MSTrIPES ऐप से डिजिटल डेटा दर्ज किया जा रहा है।
  • बिना नेटवर्क भी चालू: यह ऐप ‘ऑफलाइन मोड’ में काम करता है। इंटरनेट न होने पर भी डेटा सुरक्षित रहेगा और नेटवर्क मिलते ही सर्वर पर सिंक हो जाएगा।
  • फर्जी गश्त बंद: ऐप के GPS ट्रैकर से वनकर्मी की गश्त का हर कदम रिकॉर्ड होगा। किस बीट में कितनी दूरी तय हुई, इसकी सटीक लोकेशन मिलेगी।
  • उत्तराखंड में सफल प्रयोग: राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इस ऐप के जरिए फील्ड डेटा सफलतापूर्वक जुटाया गया है।

देहरादून। देश में बाघों की राष्ट्रीय गणना (All India Tiger Estimation) अब सिर्फ कैमरा ट्रैप, पदचिह्नों और कागजी रजिस्टरों तक सीमित नहीं रह गई है। घने जंगलों में बाघों की सटीक और वैज्ञानिक गिनती के लिए पहली बार MSTrIPES Ecology मोबाइल ऐप का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा विकसित इस ऐप से गश्त का हर कदम और वन्यजीवों से जुड़ा हर साक्ष्य मौके पर ही डिजिटल रूप से दर्ज हो रहा है।

कागज का काम खत्म, इंसानी गलती की गुंजाइश नहीं

घने जंगलों में पैदल चलकर बाघों के पदचिह्न (Pugmarks), मल (Scat), खरोंच के निशान, जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता जैसे साक्ष्य जुटाना दुनिया के सबसे कठिन सर्वेक्षणों में माना जाता है। पहले वनकर्मी इन जानकारियों को कागजों पर दर्ज करते थे, जिसके डिजिटलीकरण में समय लगता था और गलती की संभावना रहती थी।

वन अधिकारियों के अनुसार, इस डिजिटल बदलाव से बाघों का डेटा पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी, वैज्ञानिक और विश्वसनीय हो गया है।

नो-नेटवर्क जोन में भी सुरक्षित रहेगा डेटा

जंगलों के अधिकांश इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होता। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ऑफलाइन मोड में भी पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है। वनकर्मी जैसे ही गश्त पूरी कर नेटवर्क वाले इलाके में आते हैं, पूरा डेटा अपने आप केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाता है।

फर्जी गश्त पर लगाम, हर कदम का GPS ट्रैक

MSTrIPES ऐप से वनकर्मियों की लापरवाही या फर्जी पेट्रोलिंग की संभावना लगभग खत्म हो गई है।

  • गश्त की निगरानी: वनकर्मी किस बीट में गया, कितनी दूरी तक गश्त की और कौन-सा इलाका छूटा—यह सब GPS मैप पर दर्ज होता है।
  • साक्ष्यों की एंट्री: जंगल में हाथी, भालू, तेंदुए या बाघ के पदचिह्न, खरोंच या प्रत्यक्ष दर्शन होने पर वनकर्मी फोटो और लोकेशन ऐप में तुरंत अपलोड कर सकते हैं।

राजाजी और कॉर्बेट रिजर्व में वनकर्मियों को विशेष ट्रेनिंग

उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत कई वन क्षेत्रों में इस ऐप का फील्ड डेटा एकत्र करने के लिए सफल इस्तेमाल हुआ है। सालों तक नियमित गश्त में टेस्टिंग के बाद अब इसे बाघों की आधिकारिक गणना में शामिल किया गया है। इसके लिए फील्ड स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है।

AI और कैमरा ट्रैप से बन रही ‘जंगलों की डिजिटल डायरी’

भारत सरकार के अनुसार, देश की बाघ गणना दुनिया का सबसे बड़ा जैव विविधता सर्वेक्षण है। इसमें MSTrIPES ऐप के साथ-साथ कैमरा ट्रैप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीआईएस (GIS) और फोटो पहचान प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। यह ऐप अब केवल एक जरिया नहीं, बल्कि जंगलों की ‘डिजिटल डायरी’ बन चुका है।