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धराली आपदा की पहली बरसी: गीता पाठ के साथ 101 पौधे रोपकर दी श्रद्धांजलि; 115 घर हुए थे तबाह

5 August 2026

AI News Reader

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धराली आपदा की पहली बरसी: गीता पाठ के साथ 101 पौधे रोपकर दी श्रद्धांजलि; 115 घर हुए थे तबाह

उत्तरकाशी (उत्तराखंड) :उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को आज (5 अगस्त 2026) पूरा एक साल हो गया है। खीरगंगा (खेरागाड़) में आए फ्लैश फ्लड ने धराली बाजार को पूरी तरह तबाह कर दिया था, जिसमें धराली के 8 ग्रामीणों समेत कुल 70 लोगों की जान चली गई थी।

आज त्रासदी की पहली बरसी पर ग्रामीणों ने खीरगंगा तट पर 5 विद्वान पंडितों के साथ रुद्राष्टक, पितृ शांति और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान आपदा स्थल पर 101 पौधे रोपे गए। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि हर साल 5 अगस्त को यहां पौधरोपण कर दिवंगतों को याद किया जाएगा और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।

  • 101 पौधों का रोपण: खीरगंगा के तट पर गीता पाठ के साथ 70 मृतकों को दी श्रद्धांजलि, हर साल 5 अगस्त को पौधरोपण का संकल्प।
  • 30 परिवार अब भी बेघर: 115 घर पूरी तरह तबाह हुए थे; 21 परिवारों के पुनर्वास के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वे पूरा, 66 का काम अंतिम चरण में।
  • ₹6.83 करोड़ की सहायता: प्रभावित होटल स्वामियों को बांटे गए; मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और बेघर परिवारों को 6 महीने तक किराया भत्ता दिया गया।

115 घर तबाह हुए थे, आज भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं 30 परिवार

एक साल पहले आई इस आपदा ने कई हंसते-खेलते परिवारों को पलभर में बेघर कर दिया था। धराली में होटल, मकान, दुकानें और वर्षों की मेहनत से तैयार सेब के बगीचे मलबे में समा गए थे।

आपदा के 1 साल बीत जाने के बाद भी करीब 30 परिवार आज भी किराए के मकानों या रिश्तेदारों के घर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन के मुताबिक, 21 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वे का काम पूरा हो चुका है। 66 अन्य प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि 25 परिवारों के मामलों में भी जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

5 अगस्त 2025 को क्या हुआ था? (आपदा का खौफनाक मंजर)

5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के खेरागाड़ बेसिन (खीरगंगा) में अचानक बादल फटने जैसा फ्लैश फ्लड आया था।

  • बाढ़ के साथ आए मलबे ने करीब 2 लाख वर्ग मीटर के दायरे को पाट दिया था।
  • प्रसिद्ध कल्पेश्वर मंदिर मलबे के नीचे पूरी तरह दब गया था।
  • धराली का पूरा मुख्य बाजार तबाह हो गया था और पास के हर्षिल क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ था।
  • हादसे में 18 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 13 की हालत बेहद गंभीर थी। कई लोग आज भी लापता हैं जिनका कोई सुराग नहीं मिल सका।

सरकार से कितना मिला मुआवजा और राहत पैकेज?

मद / प्रभावित श्रेणी

दी गई आर्थिक सहायता

मृतकों के परिजन

₹5 लाख प्रति परिवार (₹4 लाख SDRF + ₹1 लाख CM राहत कोष)

पूर्ण क्षतिग्रस्त मकान (115 स्वामी)

₹5-5 लाख प्रति मकान मालिक

बेघर परिवार (115 परिवार)

₹24,000 (₹4,000 प्रति माह की दर से 6 महीने का किराया)

प्रभावित होटल स्वामी

₹6 करोड़ 83 लाख 73 हजार से अधिक का वितरण

जख्मों के बीच उम्मीद की नई किरण: सेब बागवानी और ट्रैकिंग से फिर संभल रहा धराली

आपदा के जख्म गहरे होने के बावजूद धराली के लोग अब धीरे-धीरे खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

  • खेती और बागवानी: सेब के बगीचों और नकदी फसलों की खेती को ग्रामीण फिर से आजीविका का सहारा बना रहे हैं।
  • स्वरोजगार से जुड़ीं युवतियां: गांव की युवतियों ने हार न मानते हुए आर्थिक जिम्मेदारी संभाली है और ट्रैकिंग व पर्यटन से जुड़े स्वरोजगार अपनाए हैं।
  • सुरक्षा दीवार की मांग: ग्रामीणों का कहना है कि खीरगंगा के किनारे दोबारा होटल बनाना जोखिम भरा है, लेकिन अगर नदी तट पर मजबूत सुरक्षा दीवार बनाई जाए तो खेती और व्यापार को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।