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उत्तराखंड में 18,600 अपात्र राशन कार्ड निरस्त: बंगलों और गाड़ियों के मालिक भी ले रहे थे मुफ्त राशन; नैनीताल और देहरादून में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा

20 August 2026

AI News Reader

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उत्तराखंड में 18,600 अपात्र राशन कार्ड निरस्त: बंगलों और गाड़ियों के मालिक भी ले रहे थे मुफ्त राशन; नैनीताल और देहरादून में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा

देहरादून: उत्तराखंड की सरकारी राशन वितरण प्रणाली में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रदेश भर में चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग ने 18,600 अपात्र राशन कार्डों को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि कई ऐसे परिवार भी सालों से मुफ्त या सब्सिडी वाले सरकारी राशन का लाभ उठा रहे थे, जिनके पास आलीशान बंगले और निजी गाड़ियां हैं।

सत्यापन में खुला राज: 8 चरणों की जांच में पकड़े गए अपात्र

राज्य सरकार द्वारा 28 अप्रैल से 29 जून के बीच प्रदेश भर में 8 चरणों में सघन राशन कार्ड सत्यापन अभियान चलाया गया। जांच में सामने आया कि हजारों परिवारों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार हो चुका है, फिर भी वे गरीबों के हक का अनाज ले रहे थे।

अपात्र पाए जाने के मुख्य कारण:

  1. परिवार की वार्षिक आय में नियमों से अधिक वृद्धि होना।
  2. परिवार के किसी सदस्य की सरकारी नौकरी लग जाना।
  3. आयकर (Income Tax) भरने वाले लाभार्थियों का कार्ड में दर्ज होना।
  4. मूल राशन कार्ड धारक की मृत्यु के बावजूद योजना का लाभ लेते रहना।

क्यों जरूरी था अपात्र कार्डों को हटाना?

भारत सरकार और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत उत्तराखंड के लिए राशन कार्डों का कोटा तय है:

  • राज्य में अधिकतम 24 लाख राशन कार्ड बनाए जा सकते हैं।
  • वर्तमान में प्रदेश में 23.35 लाख राशन कार्ड धारक पहले से मौजूद हैं।

नियमों के अनुसार, नए जरूरतमंद परिवारों का राशन कार्ड तभी बन सकता है, जब अपात्रों के कार्ड निरस्त किए जाएं। कोटा लगभग पूरा होने के कारण वास्तविक पात्र व गरीब परिवारों के नए कार्ड नहीं बन पा रहे थे।

उत्तराखंड में राशन कार्ड की श्रेणियां और पात्रता नियम

  • सफेद कार्ड (राज्य खाद्य योजना – अत्यंत गरीब/BPL): प्रदेश में लगभग 1.84 लाख का कोटा तय है। इसके लिए मासिक आय सीमा ₹4,000 तक निर्धारित है।
  • गुलाबी कार्ड (NFSA – BPL): प्रदेश में 12 लाख कार्ड निर्धारित हैं, जिनके लिए मासिक पारिवारिक आय ₹15,000 से कम होनी चाहिए।
  • पीला कार्ड (APL): करीब 10 लाख कार्ड का कोटा है, जिसके लिए वार्षिक आय ₹5 लाख तक तय है।

जिलावार निरस्त किए गए राशन कार्डों के आंकड़े

अभियान के दौरान सबसे ज्यादा अपात्र कार्ड नैनीताल, देहरादून, उधम सिंह नगर और पौड़ी जिले में मिले:

जिला

निरस्त राशन कार्ड

नैनीताल

4,247

देहरादून

2,886

उधम सिंह नगर

1,926

पौड़ी गढ़वाल

1,798

हरिद्वार

1,576

पिथौरागढ़

1,573

टिहरी गढ़वाल

1,515

चमोली

1,063

चंपावत

562

अल्मोड़ा

463

उत्तरकाशी

449

रुद्रप्रयाग

317

बागेश्वर

225

कुल निरस्त कार्ड

18,600

विभागीय आयुक्त का बयान

"
“मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश भर में जिला प्रशासन के सहयोग से विशेष अभियान चलाया गया था। राज्य में कार्डों का कोटा निर्धारित होने के कारण अपात्रों को हटाना जरूरी था, ताकि असली जरूरतमंदों के नए कार्ड बनाए जा सकें। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 18,600 कार्ड निरस्त किए गए हैं। भविष्य में भी यह अभियान समय-समय पर जारी रहेगा।”— बंशीलाल राणा, आयुक्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग
"

मानसून में आबादी की तरफ आ रहे वन्यजीव

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