UTTARAKHAND

फिक्का नदी के पुनरुद्धार को लेकर कसरत तेज, मुख्य अभियंता ने किया स्थलीय निरीक्षण

काशीपुर/ऊधम सिंह नगर। जनपद में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने और जल संरक्षण की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए शासन ने कमर कस ली है। शनिवार को लघु सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष ई० बीके तिवारी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टीम ने फिक्का नदी क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने आधा दर्जन तालाबों, चेकडैम और सरकारी भवनों में प्रस्तावित रीचार्ज पिट्स का तकनीकी परीक्षण किया।

इन गांवों में पहुंची विशेषज्ञों की टीम
मुख्य अभियंता के नेतृत्व में तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों का दल ग्राम हाजिरो, किशनपुर, देवीपुरा और मंडुआखेड़ा पहुंचा। निरीक्षण का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य स्तरीय स्प्रिंग एण्ड रिवर रिजुविनेशन प्राधिकरण (SARRA) के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाएं रहीं। अधिकारियों ने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जल संचयन के लिए चिन्हित स्थलों की उपयोगिता जांची।

छह तालाब और चेकडैम का खाका तैयार
निरीक्षण के दौरान टीम ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों का आंकलन किया:

06 प्रस्तावित तालाब: SARRA के तहत जल संचयन के लिए चिन्हित छह स्थलों का बारीकी से निरीक्षण किया गया।

चेकडैम का निर्माण: फिक्का नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए एक चेकडैम के निर्माण स्थल का तकनीकी परीक्षण हुआ।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग: वर्षा जल को सहेजने के लिए क्षेत्र के सरकारी भवनों का निरीक्षण किया गया, जहाँ आधुनिक रीचार्ज पिट बनाए जाने की योजना है।

“फिक्का नदी का संरक्षण और जल स्तर में सुधार स्थानीय कृषि और पर्यावरण के लिए अनिवार्य है। संबंधित टीम को तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) जल्द सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि योजनाओं को बजट आवंटन और स्वीकृति हेतु आगे बढ़ाया जा सके।”
— ई० बीके तिवारी, मुख्य अभियंता, लघु सिंचाई विभाग

निरीक्षण दल में ये रहे शामिल
इस महत्वपूर्ण भ्रमण के दौरान प्रदेश स्तरीय नोडल अधिकारी (SARRA) ई० पीके सिंह, नोडल अधिकारी (PM-कुसुम) ई० राजीव रंजन, अधिशासी अभियंता (ऊधम सिंह नगर) ई० सुशील कुमार, अधिशासी अभियंता (नैनीताल) ई० प्रशांत कुमार सहित SARRA टीम के तकनीकी विशेषज्ञ और क्षेत्रीय स्टाफ मौजूद रहा।

बड़ी बात: इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल फिक्का नदी के अस्तित्व को नई संजीवनी मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल और बेहतर भू-जल स्तर का लाभ मिल सकेगा।

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