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पंतनगर विवि में बोले सचिव- शोध को जनोपयोगी बनाएं वैज्ञानिक; डेयरी फॉर्म में 22 लीटर दूध देने वाली गायों ने खींचा ध्यान

टीवी 10 इंडिया मीडिया नेटवर्क
पंतनगर। शासन के सचिव (संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन) दीपक कुमार ने शनिवार को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का भ्रमण कर यहाँ हो रहे शोध और नवाचारों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों की सराहना करते हुए कहा कि शोध कार्यों को लैब से निकालकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना होगा, तभी राज्य का समग्र विकास संभव है।

उन्नत नस्ल की गायें बनेंगी किसानों की आय का आधार
विश्वविद्यालय के डेयरी फॉर्म के निरीक्षण के दौरान सचिव ने पशुपालन क्षेत्र में हो रहे अनुसंधानों की जानकारी ली। यहाँ प्रतिदिन 20 से 22 लीटर दूध देने वाली उन्नत नस्ल की गायों को देख उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पशुपालन में ऐसे नवाचार उत्तराखंड के काश्तकारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

शहद और मशरूम उत्पादन से बढ़ेगा स्वरोजगार
भ्रमण के दौरान सचिव ने मधुमक्खी पालन केंद्र और मशरूम उत्पादन इकाई का भी बारीकी से निरीक्षण किया:

शहद उत्पादन: उन्होंने राज्य में शहद उत्पादन को स्वरोजगार के एक बड़े मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

मशरूम उत्पादन: वैज्ञानिकों ने मशरूम की विभिन्न प्रजातियों और उनके प्रसंस्करण (Processing) की जानकारी दी। सचिव ने निर्देश दिए कि मशरूम उत्पादन को और अधिक प्रोत्साहित किया जाए ताकि ग्रामीण युवाओं को घर के पास ही रोजगार मिल सके।

शोध कार्यों को बनाएं जनोपयोगी
सचिव दीपक कुमार ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों को निर्देशित किया कि अनुसंधान कार्यों को केवल अकादमिक स्तर तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें अधिक व्यावहारिक और जनोपयोगी बनाएं। उन्होंने कहा कि विवि के शोध का सीधा लाभ आम जनता और सीमांत किसानों को मिलना चाहिए।

कुलपति ने दी शोध कार्यों की जानकारी
कुलपति डॉ. एसके कश्यप ने सचिव को विश्वविद्यालय की वर्तमान परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विवि निरंतर किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने वाली तकनीकों पर काम कर रहा है।

इस अवसर पर मौजूद रहे:
निरीक्षण के दौरान निदेशक प्रशासन बी एस चलाल, जिला विकास अधिकारी सुशील मोहन डोभाल, निदेशक शोध डॉ. एस के वर्मा, संयुक्त निदेशक डॉ. शिव प्रसाद सैनी, डॉ. प्रमोद मल, डॉ. एस के मिश्रा, और मुख्य उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा सहित कई वैज्ञानिक एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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