
पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर स्थित कूलागाड़ पुल बुधवार को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। पहाड़ी से गिरे भारी पत्थरों और बोल्डरों की चपेट में आने से पुल टूट गया, जिससे सीमांत क्षेत्र की लाइफलाइन माने जाने वाले इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है।
सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें मशीनरी के साथ मौके पर पहुंच गई हैं और यातायात सुचारू करने के लिए वैकल्पिक डायवर्जन का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। धारचूला-तवाघाट मार्ग पर कूलागाड़ के पास अचानक पहाड़ी से विशालकाय बोल्डर गिरे, जिससे पुल का हिस्सा टूट गया।
यह मार्ग रणनीतिक दृष्टि से और स्थानीय ग्रामीणों के आवागमन के लिए बेहद अहम है। बीआरओ अधिकारियों के अनुसार, पुल के टूटने के बाद तुरंत वैकल्पिक मार्ग बनाने का काम शुरू कर दिया गया है और शाम तक डायवर्जन तैयार कर हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कूलागाड़ पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के मद्देनजर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
- 9वां जत्था: कैलाश मानसरोवर यात्रा का 9वां जत्था आज (बुधवार) तिब्बत से भारत सीमा में प्रवेश कर रहा है। इस जत्थे में 48 तीर्थयात्री और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के 3 कुक शामिल हैं।
- 10वां जत्था: यात्रा का 10वां जत्था अभी तिब्बत में है, जिसके 23 अगस्त को 44 सदस्यों और 3 कुक के साथ भारत लौटने की संभावना है।
यात्रियों के सुरक्षित आवागमन को देखते हुए प्रशासन की प्राथमिकता मार्ग को बिना देरी किए सुचारू करना है।
मानसून के दौरान इस मार्ग पर चट्टानें खिसकना आम बात है, लेकिन पुल क्षतिग्रस्त होने से चुनौती बढ़ गई है। बीआरओ का कहना है कि शाम तक डायवर्जन रूट तैयार कर लिया जाएगा, जिससे फंसे हुए वाहनों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों के काफिले को सुरक्षित निकाला जा सके। फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
