
खास बातें (Key Points):
- सख्त कार्रवाई: एफडीए आयुक्त विनय शंकर पांडे के 7 अगस्त के आदेश के बाद पूरे प्रदेश में गैर-दुग्ध उत्पादों और अमानकीकृत डेयरी एनालॉग पर पूर्ण प्रतिबंध।
- 11 दिनों का एक्शन: 18 अगस्त तक 88 प्रतिष्ठानों में छापेमारी कर 88 सैंपल जांच के लिए भेजे गए; ऋषिकेश में 100 किलो एनालॉग पनीर नष्ट किया गया।
- दुकानें बंद: घोर लापरवाही और बिना लाइसेंस पाए जाने पर 10 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों को बंद कराकर सीजेएम (CJM) कोर्ट में केस दर्ज करने की तैयारी।
- हाईटेक टेस्टिंग: देहरादून में 5000 सैंपल क्षमता वाली नई लैब शुरू; अब 14 दिनों के भीतर आएगी खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट।
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों और नकली दुग्ध उत्पाद बेचने वालों पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कड़ा प्रहार शुरू कर दिया है। प्रदेश में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग (केमिकल व वनस्पति तेल से बना नकली पनीर/दूध) और गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
आदेश जारी होने के बाद से अब तक प्रदेश भर के 88 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर सैंपल सील किए गए हैं, जबकि नियमों की अनदेखी करने वाली 10 से अधिक दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है।
उत्तराखंड में त्योहारों के दौरान दूध और पनीर की खपत अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जबकि स्थानीय उत्पादन सीमित है। इसी का फायदा उठाकर बाहरी राज्यों से बड़े पैमाने पर नकली व एनालॉग पनीर सप्लाई किया जाता है।
स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक इस मिलावट को रोकने के लिए एफडीए के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने 7 अगस्त को सख्त प्रतिबंध का आदेश जारी किया था। इसके बाद विभाग की टीमों ने छोटे-बड़े सभी खाद्य प्रतिष्ठानों की चेकिंग तेज कर दी है।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि विभाग अब केवल मौके से माल नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को तोड़ा जा रहा है।
“एनालॉग पनीर दूध से नहीं बनता, जिससे इसके सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। हमने पड़ोसी राज्यों से संपर्क साधा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली उत्पाद कहां से सप्लाई हो रहे हैं और राज्य में किस-किस डीलर तक पहुंचे हैं। मिलावट के इस नेटवर्क में शामिल लोगों के खिलाफ सीधे सीजेएम (CJM) कोर्ट में मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।”— ताजबर सिंह जग्गी, अपर आयुक्त (FDA उत्तराखंड)
अब 14 दिन में आएगी रिपोर्ट, देहरादून में शुरू हुई 5000 कैपेसिटी वाली लैब
अपर आयुक्त ने बताया कि पहले नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में काफी वक्त लगता था, जिससे मिलावटखोर बच निकलते थे। लेकिन अब व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है:
- रुद्रपुर के साथ देहरादून लैब: देहरादून में 5000 सैंपल टेस्टिंग क्षमता वाली अत्याधुनिक लैब शुरू हो चुकी है।
- 14 दिन में रिपोर्ट: अब किसी भी संदिग्ध सैंपल की जांच रिपोर्ट अधिकतम 14 दिन में मिल जाएगी।
- विशेष चेकलिस्ट: छापेमारी केवल पनीर तक सीमित नहीं है, बल्कि किचन की स्वच्छता (हाइजीन), कर्मचारियों की ट्रेनिंग, कच्चे माल के बिल, पैकेजिंग और फूड लाइसेंस की जांच के लिए स्पेशल चेकलिस्ट बनाई गई है।
क्या होता है डेयरी एनालॉग (Analog Paneer)?
- कैसे बनता है: इसमें दूध या फैट की जगह वनस्पति तेल (पाम ऑयल), स्टार्च, डिटर्जेंट या केमिकल इमल्सीफायर का इस्तेमाल कर पनीर जैसा उत्पाद तैयार किया जाता है।
- नुकसान: यह पेट के गंभीर रोगों, कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और लीवर-किडनी पर बुरा असर डालने का मुख्य कारण बनता है।
