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पीएम मोदी का देहरादून दौरा: राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक के जंगलों में हाई अलर्ट; 16 टीमें तैनात, वेटरनरी डॉक्टर्स के साथ QRT मुस्तैद

देहरादून | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन और अन्य कार्यक्रमों के मद्देनजर सुरक्षा के अभेद इंतजाम किए गए हैं। खास बात यह है कि इस बार सुरक्षा का मोर्चा सिर्फ पुलिस और SPG के हाथों में नहीं है, बल्कि वन विभाग को भी एक बड़ी और संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रमुख बिंदु:

  • मल्टीलेयर सिक्योरिटी: SPG, उत्तराखंड और यूपी पुलिस के साथ वन विभाग का कड़ा पहरा।
  • वाइल्ड लाइफ का खतरा: राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक फॉरेस्ट रेंज में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर।
  • स्पेशल टीमें: 16 विशेष टीमें और 80 से ज्यादा वनकर्मी एक्सप्रेसवे और कार्यक्रम स्थल के आसपास तैनात।
  • बंदरों का रेस्क्यू: उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू।

जंगली जानवरों और सुरक्षा के बीच तालमेल

प्रधानमंत्री का काफिला और कार्यक्रम स्थल शिवालिक पहाड़ियों और राजाजी टाइगर रिजर्व के बेहद करीब है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा जंगलों से होकर गुजरता है। ऐसे में किसी जंगली जानवर के आने से सुरक्षा में चूक न हो, इसके लिए वन विभाग ने पूरे इलाके को अलग-अलग सेक्टरों में बांट दिया है।

80 वनकर्मी और 16 टीमें संभालेंगी मोर्चा

वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को दो भागों में बांटा है:

  1. देहरादून फॉरेस्ट डिवीजन: यहां 10 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें 50 वनकर्मी शामिल हैं। ये टीमें आशारोड़ी से लेकर गढ़ी कैंट तक गश्त कर रही हैं।
  2. डाट काली मंदिर क्षेत्र: यह इलाका राजाजी टाइगर रिजर्व में आता है। यहाँ 6 विशेष टीमें तैनात हैं, जिनमें 30 अनुभवी कर्मचारियों को लगाया गया है।

QRT के साथ वेटरनरी डॉक्टर भी तैनात

किसी भी आपात स्थिति (Emergency) से निपटने के लिए वन विभाग ने क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) का गठन किया है। इन टीमों में केवल प्रशिक्षित जवान ही नहीं, बल्कि वेटरनरी डॉक्टर्स को भी शामिल किया गया है। यदि कोई वन्यजीव कार्यक्रम स्थल या रूट के पास दिखता है, तो डॉक्टर और एक्सपर्ट्स उसे तुरंत सुरक्षित तरीके से वहां से हटाने का काम करेंगे।

उत्पाती बंदरों के लिए विशेष अभियान

देहरादून में बंदरों का आतंक एक बड़ी समस्या है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बंदर किसी तरह का व्यवधान न डालें, इसके लिए शिवालिक सीएफ (CF) राजीव धीमान के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

राजीव धीमान (CF, शिवालिक) ने बताया-

“जिन इलाकों में बंदरों की संख्या ज्यादा है, वहां से उन्हें पकड़कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ा जा रहा है। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान बंदरों की वजह से कोई अव्यवस्था न फैले।”

चप्पे-चप्पे पर नजर

वन विभाग और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए भी वन्यजीवों की मूवमेंट ट्रैक की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा और वन्यजीवों को भी किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।

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