नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित नंधौर वन्यजीव अभयारण्य से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। अभयारण्य में वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में दुर्लभ वन्यजीव ‘ऊदबिलाव’ (Otters) की गतिविधियां रिकॉर्ड की गई हैं। यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में ऊदबिलावों के झुंड को आधिकारिक रूप से कैमरे में कैद किया गया है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नंधौर क्षेत्र के नदी-नालों के पास लगे कैमरों में ऊदबिलावों की चहल-पहल देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र के जलस्रोत स्वच्छ हैं और वहां का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) पूरी तरह स्वस्थ है।
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ (DFO) कुंदन कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि ऊदबिलाव को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा, “नंधौर अभयारण्य में ऊदबिलाव की गतिविधियों का जिक्र तो पहले भी होता था, लेकिन पहली बार हमारी टीम ने इनके झुंड को मोबाइल और कैमरा ट्रैप में कैद करने में सफलता हासिल की है। यह हमारे संरक्षण प्रयासों की बड़ी जीत है।”
ऊदबिलाव एक अर्ध-जलीय स्तनधारी जीव है, जो मुख्य रूप से स्वच्छ पानी में रहना पसंद करता है। इनका मुख्य भोजन मछली, मेंढक और झींगे होते हैं। किसी भी वन क्षेत्र में इनकी उपस्थिति वहां की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) की मजबूती और जलधाराओं की शुद्धता को प्रमाणित करती है। नंधौर अभयारण्य, जो तराई-भाबर क्षेत्र में स्थित है, कई छोटी-बड़ी नदियों का उद्गम स्थल है, जो इन जीवों के लिए आदर्श आवास प्रदान करता है।
वन विभाग ने इस सफलता का श्रेय पिछले कुछ वर्षों में बढ़ाए गए संरक्षण और निगरानी प्रयासों को दिया है। विभाग ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे नदी-नालों में कूड़ा-कचरा न फेंकें और प्रदूषण न फैलाएं। अधिकारियों का कहना है कि जनभागीदारी से ही इन दुर्लभ प्रजातियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस दुर्लभ नजारे के सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में नंधौर अभयारण्य जैव विविधता के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।
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