ऋषिकेश: बहुचर्चित एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड घोटाले में फंसे उत्तराखंड के लाखों निवेशकों के धनवापसी आवेदन पत्रों के सत्यापन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं के विरोध में सोमवार को उत्तराखंड जन विकास मंच ने मोर्चा खोल दिया। मंच के बैनर तले ऋषिकेश तहसील परिसर में निवेशकों ने दो घंटे का सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पीड़ित निवेशकों ने भाग लिया और सरकार व प्रशासन से आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने की जोरदार मांग उठाई।
धरने को संबोधित करते हुए मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर एलयूसीसी मामले में लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है, जिसके माध्यम से निवेशकों से धनवापसी के लिए आवेदन पत्र भरवाए जा रहे हैं। वर्तमान प्रक्रिया अत्यधिक जटिल होने के कारण सामान्य निवेशकों को फॉर्म भरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-छोटी तकनीकी त्रुटियों के कारण आवेदन खारिज होने का खतरा बना हुआ है।
उन्होंने आगे बताया कि आवेदन पत्रों को राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित कराना अनिवार्य किया गया है, जबकि अधिकारियों की सीमित संख्या के चलते प्रतिदिन केवल 40 से 50 आवेदन ही सत्यापित हो पा रहे हैं। ऐसे में तय समय सीमा के भीतर हजारों निवेशकों के आवेदन पूरा होना असंभव नजर आ रहा है, जिससे बड़ी संख्या में पीड़ितों के अपनी गाढ़ी कमाई से वंचित रहने का अंदेशा है।
आशुतोष शर्मा ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अकेले ऋषिकेश तहसील क्षेत्र में ही लगभग 20 हजार निवेशक प्रभावित हैं। पूरे उत्तराखंड में एलयूसीसी घोटाले से 1 लाख 60 हजार से अधिक निवेशक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 90 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जो अपनी जीवनभर की जमा पूंजी वापस पाने के लिए पूरी तरह सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर हैं।
विशेष शिविर लगाने की मांग
मंच ने मांग की है कि प्रशासन व्यवस्था को केवल तहसील तक सीमित न रखे। इसके बजाय ऋषिकेश, हरिपुर कलां, रायवाला और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सत्यापन शिविर आयोजित किए जाएं और वहां राजपत्रित अधिकारियों की अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएं, ताकि अधिक से अधिक निवेशकों के आवेदन समय पर सत्यापित हो सकें।
मंच अध्यक्ष ने कहा कि इस समस्या को लेकर 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और सत्यापन व्यवस्था को सुगम नहीं किया, तो पीड़ित निवेशकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। धरने में शामिल अन्य निवेशकों ने भी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने की पुरजोर अपील की है।
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